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Wednesday, 21 February 2018

Motivational Tips For Exam Preparation

Motivational Tips For Exam preparation In Hindi

पढ़ाई की एक खूबी है। जब इसे मजबूरी में करना पड़े तो ये बोझ बन जाती है। और अगर इच्छा से किया जाए तो दिललगी बन जाती है। ठीक वैसे ही है जैसे अगर आपको जबरन किसी लड़की या फिर लड़के से शादी करना पड़े तो आपके लिए ये शादी बोझ बन जाती है। और अगर आपने इच्छा से शादी की है तो ये जिंदगी को झिंगालाला बना देती है।
motivational quotes for exam preparation
अब सवाल उठता है कि पढ़ाई से मोहब्बत कैसे की जाए? यानी पढ़ाई में मन कैसे लगाया जाए? दरअसल, पढ़ाई अगर आप इसलिए कर रहे हैं कि आपको इससे कुछ हासिल करना है तो आपको ये पढ़ाई बोझ लगने लगती है। क्योंकि आप इसलिए नहीं पढ़ रहे होते हैं कि आपको कुछ सीखना है बल्कि आप इसलिए पढ़ रहे होते हैं कि आपको कुछ हासिल करना है। हासिल करने का भाव आते ही सबसे पहले आपके मन में भय की उत्पत्ति होती है। ये भय कुछ केस में इतना भयावह हो जाता है कि आप आप पढ़ने से ही डरने लगते हैं। आपको लगता है कि अगर आपने इतनी पढ़ाई की और फिर भी आपको अपना लक्ष्य हासिल नहीं हुआ तो आप क्या करेंगे?

तो समझ में आया कि पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगता? ये भय आपको पढ़ने नहीं देता क्योंकि आपने पढ़ाई का सीधा संबंध अपने लक्ष्य से जोड़ दिया। और आप जब पढ़ रहे होते हैं तो आपके मन में पढ़ाई की गूढ़ बातों से ज्यादा आपके लक्ष्य की चिंता होती है।

आपको थ्री इडियट्स फिल्म तो याद होगी। जिसमें रणछोड़ दास छाछल यानी आमिर खान पढ़ाई इसलिए नहीं करता कि उसे कुछ हासिल करना है बल्कि वो इसलिए पढ़ाई करता है कि क्योंकि उसे पढ़ने में मजा आता है। बस आप भी इस पढ़ाई के साथ इस मजे को जोड़ दिए। देखिए आपकी जिंदगी भी बदल जाएगी। आपके मन का वो भय खत्म हो जाएगा जो आपको अपके लक्ष्य की ओर बढ़ने से रोक रहा है। तो उठिए। फैसला लीजिए। आप इसलिए नहीं पढ़ेंगे कि आपको कुछ हासिल करना है। आपको पढ़ना इसलिए क्योंकि आपको कुछ सीखना है। जबतक सीखेंगे आगे बढ़ेंगे। जिस दिन सीखना बंद। खेल खत्म। 

Friday, 2 February 2018

कलेक्टर बनना है तो ये लेख जरूर पढ़ें, यकीन मानिए जिंदगी बदल जाएगी

ज्ञान+प्रेरणा=सफलता। दुनिया में कामयाब होेने का इससे सफलतम कोई फॉर्मूला नहीं है। अगर आप दुनिया में कुछ भी हासिल करना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है ज्ञान। क्योंकि ज्ञान के बिना आप कुछ नहीं कर सकते हैं। और दूसरा है प्रेरणा। बिना प्रेरणा के भी आप लाख ज्ञानी होते हुए भी कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। अगर आप IAS बनना चाहते हैं तो नीचे Shiva Thakur Shiva‎ जी का ये लेख जरूर पढ़ लें यकीन मानिए इसे पढ़ने के बाद अापके भीतर ऊर्जा का ऐसा संचार होगा कि आप सबकुछ भूलकर सिर्फ IAS की तैयारी के बारे में सोचने लगेंगे।

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Shiva Thakur Shiva‎ सर का लेख जैसा उन्होंने फेसबुक पर लिखा हू-ब-हू पढ़िए।
पसंद आए तो शेयर जरूर करें।
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 - - #पढाई में जब मन ना लगे जनाब तो उस #माँ - बाप का चेहरा याद कर लिया करो जो #सारे मोहल्ले में गर्व से कहते हैं - मेरा बेटा #कलेक्टर बनेगा - - - #आज फ़िर कहता हूँ दोस्तों - -#I.a.s - - - - - - तुम्हारी सबसे #बड़ी चाहत , तुम्हारी असली खुशी , तुम्हारी जिंदगी , तुम्हारा संसार तुम्हारे माँ - बाप हैं वो तुम्हारा पहला प्यार हैं तुम उनसे #बेवफ़ाई कैसे कर सकते हो - स्मरण रहे जो पहले प्यार के प्रति वफादार हैं वो ही दूसरे प्यार के असली हकदार हैं - दोस्तों - तुम्हारी आँखो को जिसने सपने दिखाये , तुम्हारी #हर बड़ी मुसीबत के वक्त तुम्हारे #सर पर उनका हाथ रहा - जिसकी उँगली पकड़कर तुमने चलना सीखा और जिन आँखो ने ये ख्वाब देखा की मेरा #बच्चा एक दिन मेरा नाम रोशन करेगा , जो मैं नही कर सका वो मेरी बेटी करेगी वो मेरा बेटा करेगा वो आज तक तेरे चेहरे को देखकर अपने सारे ग़म भुलाते आये हैं - उन्हे तुम पर #भरोसा हैं तब बताओ मुझे तुम क्यों नही अपने ख्वाबों को साकार करने के लिये कोई क़दम आगे बढ़ा रहे हो ? आखिर क्यों #खामोश बैठे हो ? क्यों नही मेहनत करना चाहते हो ? क्या यही तुम्हारा प्यार हैं ? क्या यही तुम्हारा कर्तव्य हैं ? अरे #जनाब जब पढाई में मन ना लगे तो उस बाप का चेहरा याद कर लिया करो जो सारे मोहल्ले में #छाती पीटते फिरते हैं - अरे मेरा बेटा तो कलेक्टर ही बनेगा मुझे उस पर भरोसा हैं वो #कभी मेरा सर नीचा नही करेगा - याद करो उस #माँ को जो ना जाने कितने कष्ट सहन करती हैं और इसका तुम्हे वो एहसास तक नही होने देती हैं ताकि तुम दुखी ना हो - अपना #पेट काट - काट कर तुमको पढाया - लिखाया . और आज इस काबिल बनाया की तुम जो चाहो वो प्राप्त कर सको - फ़िर भी ये #चुप्पी क्यों साध रखी हैं ? आखिर क्यों #भूल जाते हो तुम की उन्होने हमारी खुशियों के लिये उन्होने अपनी #सारी खुशियाँ त्याग दी - सिर्फ इसलिये की चलो मेरी #जिंदगी जैसे #कटी ठीक हैं लेकिन मेरे बच्चो को कोई कष्ट ना हो किसी चीज़ की कमी ना हो जाय तो अब बोलो #तुम सब अब अपनी क्या जिम्मेदारी बनती हैं ? बस अब बहूत हुवा अब समय आ गया हैं तपस्या का , #मेहनतका , #त्याग का , कूछ कर गुजरने का और अपने ख्वाबों को पूरा करने का - अब अपने माँ - बाप के होठों पर मुस्कान लाने की , तो उठाओ अब #किताबों को और लगा दो अपनी जान पढ़ डालो इतिहास , #भूगोल , संविधान , विज्ञान सब कूछ

Sunday, 21 January 2018

IAS बनना है तो GS, GK और Current Affairs का फर्क समझिए?

दोस्तों IAS EXAM के लिए हमने एक नई सीरिज शुरू की है। इस सीरिज में हम आपको IAS की तैयारी के लिए ऐसे-ऐसे Tips देंगे जो आपको और कही नहीं मिलेगा। क्योंकि इसमें बेसिक्स के साथ-साथ Advance लेवल तक की तैयारी की रणनीति बताई जाएगी। अगर आप चाहते हैं कि आपको ऐसी टिप्स लगातार मिलती रहे तो आपको दो काम करना होगा। पहला आप अपनी स्क्रीन के राइट साइट पर नीचे दिख रहे बेल आइकन को टच करके इसे अलॉउ कर दें और दूसरा नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक दिया गया है उसे लाइक कर दें। इससे फायदा ये होगा कि जब भी नए लेख आएंगे आपको फौरन सूचना मिल जाएगी।
आज हम आपको बता रहें हैं कि IAS की प्रारंभिक परीक्षा के लिए आप कैसे शुरूआत करें? जिसके लिए जरूरी है की आपकी कुछ भ्रांतियों को दूर किया जाए। तो सबसे पहले पहली भ्राांति  को दूर कर लीजिए।
प्रारंभिक परीक्षा- कम समय में कैसे बनाएं रणनीति?
IAS की प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्न पत्र होते हैं। पहला सामान्य अध्ययन का और दूसरा CSAT का। जहां तक सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र का सवाल है इसमें तीन टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं।
1-सामान्य अध्ययन यानी Gernal Studies (G.S)
2-सामान्य ज्ञान यानी Gernal Knowledge (G.K)
3-समसामयिक (Current Affairs)
नए छात्रों के सामने सबसे बड़ी कठिनाई ये होती है कि उन्हें पता ही नहीं होता है कि GS और GK में फर्क क्या होता है? दोनों में आपको अंतर समझाएं इससे पहले ये जान लीजिए की IAS की परीक्षा में G.K से ना के बराबर सवाल आते हैं। जबकि PCS, SSC, BANK, RAILWAY जैसी परीक्षाओं में G.K से जुड़े सवाल खूब आते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि दोनों में भला अंतर क्या है? जब तक आप ये अंतर नहीं समझेंगे IAS की तैयारी नहीं कर पाएंगे। इसलिए जरूरी है कि पहले आप इसमें फर्क करना सीखें।
G.S का सीधा सा मतलब है General Studies यानी हर उस विषय का सामन्य अध्ययन जिसकी जरूरत समाज में एक अधिकारी या कर्मचारी के तौर पर आपको पड़ सकती है। जहां तक General Studies में आनेवाले विषयों का सवाल है इसमें।
  • भारत का इतिहास और फ्रीडम स्ट्रगल मूवमेंट
  • भारतीय संविधान और राज्यव्यवस्था
  • भारत और विश्व का भूगोल
  • पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
  • अर्थव्यवस्था और सांख्यिकी
  • सामान्य विज्ञान और प्रद्योगिकी
  • सामाजिक विकास और प्रशासन 
जैसे टॉपिक आते है। जबकि General Knowledge यानी G.K में सामान्य ज्ञान से जुड़े। अब सवाल ये है कि सामन्य ज्ञान क्या होता है? सामान्य ज्ञान का मतलब ऐसे टॉपिक्स से है जिससे जुड़े सवालों के जवाब एक सामान्य या कह लें आम आदमी को भी आना चाहिए। कहने का आशय ये है कि सामान्य ज्ञान एक सामान्य आदमी से जुड़ा ज्ञान हैं। जैसे,
  • सड़क पर गाड़ी चलाने के नियम क्या हैं?
  • भारत का राष्ट्रीय खेल क्या है?
  • राष्ट्रीय पक्षी मोर है तो क्यों है?
  • तिरंगा में कितने रंग होते हैं और कौन-सा रंग किसका प्रतीक है?
  • भारत का संविधान कब बना?
  • भारत की राजधानी क्या है?
  • भारत में कुल कितने प्रदेश हैं? कितने केंद्र शासित प्रदेश हैं?
यानी ऐसे प्रश्न जिसके बारे में आपको बचपन में ही पढ़ाया गया होगा। जहां तक करेंट अफेयर्स का सवाल है इसमें रोज-रोज की घटनाओं से जुड़े ऐसे टॉपिक होते हैं जिसका असर सामाज, देश-दुनिया और देश की सियासत और प्रशासन पर पड़ता है।
IAS की तैयारी की अगली कड़ी जल्द....
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Tuesday, 2 January 2018

GST पर IIM प्रोफेसर के ये Tips निबंध में जरूर डालिए, मिलेंगे अच्छे अंक

हाल फिलहाल में होनेवाली परीक्षाओं में GST से जुड़े प्रश्न आने तय हैं। अगर आप IAS, PSC, SSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और मेंस की तैयारी या फिर देने जा रहे हैं तो आप GST से जुड़ा एक टॉपिक तय मानिए। नीचे हम GST से छोटो कारोबारियों को सामने आनेवाली समस्याओं और उसके उपाय बता रहे हैं। ये बिन्दु दैनिक जागरण अखबार में IIM के पूर्व प्रोफेसर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री भरत झुनझुनवाला ने एक लेख में पेश किया है।

NOTE:-दोस्तों अगर आप तैयारी से जु़ड़े टिप्स लगातार चाहते हैं तो स्क्रीन के राइट साइड पर नीचे की ओर बने बेल आईकॉन को क्लिक  करें और  Allow कर दें। इससे हम जब भी कोई आर्टिकल पोस्ट करेंगे आपको फौरन सूचना मिलेगी।


शोध सौजन्य-दैनिक जागरण अख़बार

GST से छोटे कारोबारियों के सामने आनेवाली समस्याएं:-

  • एक आकलन के अनुसार GST से छोटे कारोबारियों के कारोबार में करीब 40% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञ भरत झुनझुनवाला का आकलन है कि ये गिरावट जीएसटी ढांचे के कारण है। 
  • जीएसटी लागू होने से हर व्यापारी को अपना माल पूरे देश में बेचने की छूट मिल गई है। यह व्यवस्था बड़े उद्योगों के लिए फायदेमंद है जबकि छोटो उद्योगो के लिए नुकसानदेह। कारण ये है कि अंतरराज्यीय व्यापार करने की क्षमता बड़े उद्योगों की ज्यादा होती है। उनके कोरोबार का विस्तार ज्यादा है। 
  • बड़े कारोबारियों के मुकाबले छोटे कारोबारी अंतरराज्यीय व्यापार कम करते हैं। बड़े व्यापारियों को मिली GST की सहूलियतें छोटे व्यापारियों के लिये अभिशाप बन गई है। जैसे नागपुर में बने सामान अब गुवाहाटी में आसानी से पहुंच रहे हैं और वहां के स्थानीय कारोबारियों का बिजनेस चौपट हो रहा है।   
  • GST का छोटे उद्योगों पर दूसरा असर रिटर्न भरने का बोझ है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बयान में कहा है कि GST के तहत पंजीकृत 35 प्रतिशत लोग टैक्स अदा नहीं कर रहे हैं। 
  • बड़े व्यापारियों को जीएसटी से कोई समस्या नहीं है। क्योंकि उनके दफ्तर में चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंप्यूटर ऑपरेटर पहले से ही मौजूद थे। छोटे व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। 
  • छोटे व्यापारियों की तीसरी परेशानी है कि खरीद पर अदा किए गए जीएसटी का उन्हें रिफंड नहीं मिलता। मसलन, अगर किसी दुकानदार ने कागज खरीदा और GST अदा किया। बड़े दुकानदार ने कागज बेचा तो उसके खरीददार ने इस रकम का सेटफ (Refund) ले लिया। छोटे दुकानदार ने कंपोजीशन स्कीम में कागज बेचा तो उसके खरीददार को GST सेटफ नहीं मिलेगा। 
  • इन तीन ढांचागत कारणों से जीएसटी छोटे व्यापरियों के लिए कष्टकारी हो गया है। छोटे व्यापरियों के दबाव में बाजार में मांग कम हो गई है और पूरी अर्थव्यवस्था ढीली पड़ रही है और जीएसटी का कलेक्शन गिरता जा रहा है।  

GST से छोटे कारोबारियों के सामने आनेवाली समस्याओं का उपाय:-

  • कुछ उत्पादों को छोटे उद्योगों के लिये फिर से संरक्षित कर दिया जाए जैसा कि पहले था। इससे छोटे उद्योग को फायदा होगा।  
  • GST में रजिष्ट्रेशन के प्रोत्साहन स्वरूप हर व्यापारी को 500 रुपये प्रति माह का अनुदान दिया जाए। इस रकम से छोटे व्यापारी पंजीकरण के कागजी बोझ को वहन कर लेंगे। 
  • कंपोजीशन स्कीम के छोटे व्यापारियों को भी खरीद पर अदा किए गए जीएसटी को पास ऑन करने की छूट दी जाए। तब ये बड़े व्यापारियों को टक्कर दे सकेंगे। 
  • IIM के पूर्व प्रोफेसर भरत झुनझुनवाला का मानना है कि प्रस्तावित ई-वे बिल इन परेशानियों को बढ़ा सकता है। वो एक उदाहरण से इसे समझाते हैं। 
  • उनके एक दोस्त ने नवजात शिशु को डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक दवा दी। उसकी हालत नहीं सुधरी तो और बड़ी मात्र में एंटीबायोटिक दवा दी जिससे हालत सुधरने के बजाय और ज्यादा ही बिगड़ गई। इसी तरह वित्त मंत्री ने पहले अर्थव्यवस्था को GST की दवा दी। अर्थव्यवस्था नहीं सुधरी तो ई-वे बिल की दवा देना चाह रहे हैं। संभव है कि अर्थव्यवस्था और डिप्रेशन में चली जाए। 

Thursday, 21 December 2017

IAS और PCS में सलेक्शन के लिए Notes कैसे बनाएं? प्रैक्टिकल उपाय

नोट्स सफलता का पहला मंत्र है. अगर आपके नोट्स स्तरहीन हैं तो सफलता के चांसेज बहुत कम हो जाते हैं. लेकिन अगर आपके नोट्स स्तरीय हैं तो सफलता के चांसेज बढ़ जाते हैं. तो सवाल ये है कि एक स्तरीय नोट्स कैसे बनाएं? एक अच्छे नोट्स की क्या-क्या खासियत होनी चाहिए? आप नोट्स में ऐसा क्या लिखें जो आपको सफलता की ओर ले चले? आज हम आपको बिन्दुवार कुछ ऐसी गुढ़ बाते बताएंगे जिसे अपनाकर आप अपने नोट्स को स्तरीय बना सकते हैं. लेकिन उससे पहले नोट्स को लेकर कुछ गलत धारणाओं को समझना जरूरी है. तो आइए पहले समझते हैं नोट्स क्या नहीं है?
1-किताबों के अहम बिन्दुओं को सिर्फ कॉपी में नोट करना नोट्स नहीं है.
2-पांच-छह लोगों के नोट्स लेकर उसमें से अहम बातों को छांटना नोट्स नहीं है.
3-पूरी किताब को कॉपी में लिख लेना नोट्स नहीं है.
4-हर बिन्दुओं पर पांच-छह किताबों से प्वाइंट निकालकर लिखना नोट्स नहीं है.
तो सवाल ये है कि नोट्स क्या है? चलिए आपको बताते हैं कि नोट्स क्या है? नोट्स को कैसे बनाना चाहिए? नोट्स बनाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दोस्तों किसी भी विषय पर नोट्स बनाने से पहले आपको ये तय करना होगा कि आप किस परीक्षा के लिए नोट्स बना रहे हैं. हम यहां पर आईएएस परीक्षा के लिए नोट्स बनाने की चर्चा कर रहे हैं. तो हम फोकस उसी पर करेंगे. आप बाकि परीक्षाओं के लिए भी इसी मैथेड से नोट्स बना सकते हैं.

मान लीजिए आप आधुनिक इतिहास विषय के लिए नोट्स बना रहे हैं। तो सबसे पहले आपके पास तीन चीज होनी जरूरी है. 
1-आधुनिक इतिहास का सलेबेस.
2-पिछले 10 साल का अनसॉल्व पेपर.
3-इतिहास की एक बेसिक किताब. ये किताब NCERT भी हो सकती है.

अगर आपको स्तरीय नोट्स बनाना है तो सबसे पहले आप आधुनिक इतिहास के सलेबस को कम से कम 2-3 बार पढ़ डालिए. फिर इसके बाद अनसॉल्व पेपर को लीजिए. कोशिश कीजिए अगर ऐसा अनसॉल्व पेपर मिल जाए जिसमें शीर्षक वाइज सवालों को छांटा गया है तो बहुत अच्छा होगा. इसके लिए यूथ प्रकाशन, घटनाचक्र प्रकाशन, अरिहंत प्रकाश से लेकर कई प्रकाशनों का सॉल्व आता है आप उसे भी ले सकते हैं.

इसके बाद आप सलेबस के हिसाब से देखिए कि किस टॉपिक से कितने सवाल पूछे जा रहे हैं? किस तरह के सवाल आ रहे हैं? सवालों की प्रकृति कैसे साल-दर-साल बदल रही है? इसे समझने के बाद आप बेसिक किताब उठाइए और उसे पहली बार में सरसरी निगाह से पढ़ डालिए. चाहे कुछ समझ में आये चाहे ना आए.

इसके बाद आप एक बार फिर सलेबेस देखिए और शीर्षक वाइज सवालों को पढ़िए. आपको समझ में आने लगेगा कि जो सवाल पूछे जा रहे हैं वो किताब में कहां पर हैं. अब फिर से बेसिक बुक पर जाइए और उसका गहन अध्ययन शुरू कीजिए. साथ में मार्कर या फिर हाईलाइट जरूर रखें. जैसे ही आपको लगे कि इस जगह से परीक्षा में सवाल आ रहे हैं उसे मार्क कर लें. इस एक्सर्साइज में थोड़ा वक्त लगेगा. लगने दें. क्योंकि इससे आपका किसी भी विषय पर बेसिक ज्ञान मजबूत होगा. ये आपके मजबूत बुनियाद की पहली ईंट है.

किताब पढ़ने के बाद आप सलेबेस और अनसॉल्व के सवालों को फिर से देखें. आपको अब समझ में आ जाएगा कि सलेबस में बहुत से ऐसे टॉपिक हैं जिससे परीक्षा में बहुत कम सवाल पूछे जाते हैं. और कुछ टॉपिक ऐसे होते हैं जिससे सबसे ज्यादा. अब आपको इन टॉपिको को अलग-अलग छांटकर लिखना है.

अब आप फिर से अपने बेसिक बुक पर जाइए और सवाल के हिसाब से देखिए किस टॉपिक से कितने सवाल आए हैं. जिस टॉपिक से ज्यादा सवाल आएं हैं उसे पहले तैयार कीजिए. सवाल के जवाब ही आपके नोट्स हैं. अब आपको करना ये है कि किसी भी सवाल को आप अलग-अलग तरीके से खुद बनाइए और उसका जवाब बेसिक किताब में ढूढ़िये. जैसे ही जवाब मिले उसे कॉपी में लिख लें. हो सके तो नोट्स में सवाल को भी लिखते चलें. क्योंकि इस टॉपिक से सवाल आ रहे हैं मतलब कमीशन चाहता है कि आपकी इस टॉपिक पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए. और इस टॉपिक से परीक्षा में सवाल आने के चांसेज भी ज्यादा हैं. जो टॉपिक कम महत्वपूर्ण लग रहे हैं उस पर ज्यादा वक्त ना लगाएं. क्योंकि अगर इस टॉपिक से सवाल आएगा तो सिर्फ आप नहीं बाकि प्रतियोगी छात्रों को भी दिक्कत होगी. सफल वही होता है जो कॉमन सवालों को गलत नहीं करता है. विशेष के चक्कर में रहेंगे तो कभी भी सफल नहीं हो पाएंगे.

अब आपको समझ में आएगा कि बहुत से ऐसे सवाल हैं जिसका आपके बेसिक किताब में जवाब नहीं हैं. तब आप दूसरी किताब की मदद लें. ध्यान दें मदद स्तरीय किताब से लें ना कि बाजार में मिलनेवाली किसी गाइड से. और इस बात पर जरूर ध्यान दें कि आपको दूसरी किताब पूरी नहीं पढ़नी हैं. सिर्फ उतना ही पढ़ना है और उसे अपने नोट्स में शामिल करना है जिसका जवाब आपको अपनी बेसिक किताब में नहीं मिला है.

एक बात हमेशा ध्यान में रखें आपके नोट्स में हर टॉपिक के साथ कम से कम 5 पन्ने प्लेन होने चाहिए. क्योंकि जैसे-जैसे आपके पढ़ाई का स्तर बढ़ेगा आपको इस टॉपिक से जुड़े नए-नए फैक्ट मिलेंगे. जैसे ही कोई नया फैक्ट मिले उसे फौरन अपने नोट्स में जोड़ लीजिए. इसलिए सलाह यही दी जाती है कि नोट्स हमेशा A-4 साइज की प्लेन शीट पर बनाएं. क्योंकि जैसे-जैसे कोई फैक्ट आपको मिले आप जरूरत के हिसाब से शीट बढ़ा सकें. अगर आपको इस टॉपिक से जुडा कोई ड्राइग्राम या फिर फीगर मिलता है तो आप उसे सीधा फोटो कॉपी कराकर नोट्स में एड कर लीजिए.

इस छोटी-सी एक्सरसाइज से आप एक स्तरीय नोट्स बना सकते हैं. फिर आपको बेवजह की 10 किताबें पढ़ने की जरूरत नहीं होगी. एक बार मेहनत करके आप एक ऐसा नोट्स तैयार कर लेंगे जो हमेशा आपके काम आएगा. लेकिन हां, एक बात का ध्यान रखें बीच-बीच में आपको अपनी बेसिक किताब को पढ़ते रहना चाहिए. क्योंकि ये अनुभव रहा है कि आप एक ही किताब को जितनी बार पढ़ेंगे आपको नई चीज मिलेगी. आपका कांसेप्ट क्लियर होगा. फालतू की और ज्यादा से ज्यादा किताबों को पढ़ने से बचें। क्योंकि मोर स्टडी, मोर कंफ्यूजन वाली कहावत तो आपको पता ही होगी.

अगर आपको हमारी ये टिप्स पसंद आई तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें. क्योंकि बहुत-से ऐसे प्रतियोगी छात्र और छात्राएं हैं जो इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि वो नोट्स कैसे बनाएं?  

Thursday, 14 December 2017

अगर IAS बनना है तो ना करें ये 10 गलतियां?

1-बिना सोचे-विचारे तैयारी शुरु करना
हर छात्र की तैयारी की अपना स्तर और क्षमता होती है। अगर आप सिर्फ दूसरों की नकल करके तैयारी की शुरुआत करेंगे तो आप IAS नहीं बन सकते हैं क्योंकि हर इंसान का आईक्यू अलग-अलग होता है। मतलब अगर आपके परिचित में कोई IAS बन जाता है तो ऐसा नहीं कि आप भी IAS बन जाएंगे। या फिर आपके रिश्तेदारी में आप से कम पढ़नेवाला कोई छात्र IAS की परीक्षा में सेलेक्ट हो गया तो आप भी सेलेक्ट हो जाएंगे। किसी भी छात्र की अंदरूनी क्षमता कोई नहीं आंक सकता है। लिहाजा अगर आपको लगता है कि आप सच में आईएएस की परीक्षा पास कर सकते हैं तभी तैयारी करें। इसके लिए आप पुराने अनसॉल्व पेपर के साथ सेलेबस देंगे और फिर मंथन करें कि आप क्या इस लेवेल की तैयारी कर पाएंगे।

2-तैयारी से पहले रणनीति नहीं बनाना
बिना विचारे जो करें वो पाछे पछताए। ये कहावत तो सुनी होगी आपने। अगर आप भी बिना विचारे तैयारी शुरू करेंगे तो आपको बाद में पछताना पड़ेगा। इसलिए पहले आईएएस परीक्षा का लेवल देख लें फिर अपनी क्षमता देखकर ही तैयारी शुरु करें। नहीं सारे प्रयास खत्म होने के बाद पछताएंगे तो कुछ नहीं मिलेगा। वक्त भी जाएगा और कांफिडेंस भी।

3-प्रमाणिक किताबों को नहीं पढ़ना
गाइड से आईएएस परीक्षा की तैयारी अगर आप करने की सोच रहे हैं तो तैयारी बिल्कुल भी ना करें। क्योंकि आईएएस परीक्षा के सवाल किसी गाइड से नहीं आते हैं और ना ही वो किसी सेट पैटर्न पर आते हैं। इसलिए आपको अपने आप को इतना ग्रुम करना होगा कि आप गाइड के स्तर से ऊपर निकल सकें। इसलिए सिर्फ और सिर्फ प्रामाणिक किताबों का अध्यन करें और ज्यादा किताब पढ़ने से बेहतर है कि आप एक ही किताब को बार-बार-बार पढ़ें। जबतक आपका कांसेप्ट क्लियर नहीं हो जाता।

4-ग्रुप बनाकर नहीं पढ़ना
आईएएस बनने के बाद आपको  टीम वर्क में काम करना होता है। इसलिए इस तैयारी के लिए जरुरी है कि आप टीम बनाकर पढ़ें। इसके कई फायदें हैं। एक तो आपको सही मार्गदर्शन मिलता रहेगा और फालतू के निगेटिव विचारों से बचेंगे। साथ ही ऐसी बहुत से टॉपिक जो आपको समझ में नहीं आ रहे हैं ग्रुप में पढ़ने पर जल्द क्लियर हो जाते हैं। बस ग्रुप बनाते समय इस बात का ध्यान दें कि सभी लोग सीरियस हों। वर्ना ये ग्रुप अय्याशी का अड्डा बन जाएगा।

5-दूसरे के Study Plan को Follow करना
दुनिया में हर इंसान की प्रवृति अलग होती है। कोई नोट्स बनाकर पढ़ता है तो कोई किताब से ही पढ़ लेता है। इसलिए कभी-भी दूसरों का स्टडी प्लान कॉपी नहीं करें। इसमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा है। अपना खुद का स्टाइल डेवलप करें।

6-टाईम टेबल बनाकर नहीं पढ़ना
बहुत से छात्रों की शिकायत होती है कि वो पढ़ते तो बहुत हैं लेकिन सलेक्शन नहीं होता है। दरअसल होता ये है कि ऐसे छात्र एक ही विषय पर बहुत ज्यादा वक्त दे देते हैं। इसलिए टाईम टेबल बनाकर पढ़िए। अपनी पढ़ाई को एक निश्चित टाइम फ्रेंम में बांधने की कोशिश कीजिए। इससे फायदा ये होगा कि आपका समय बचेगा और सभी विषयों पर बराबरी से आप वक्त दे पाएंगे।

7-जरुतर से ज्यादा नोट्स जुटाना
तैयारी करने वाले छात्रों की सबसे बुरी आदत होती है व्यर्थ के नोट्स जुटाना। कोई सेलेक्ट हो गया तो उसके नोट्स के चक्कर में पड़ जाते हैं। मौका मिलते ही उसे फोटो कॉपी कराने लगते हैं। दरअसल ऐसे छात्र अपनी पढ़ाई से ज्यादा दूसरों की पढ़ाई पर ध्यान देते हैं। उन्हें लगता है अगर कोई सेलेक्ट हो गया तो उसका नोट्स बहुत अच्छा होगा। ऐसे लोगों को सलाह है कि ऐसा नहीं है कि IAS Topper और IAS में सफल होनेवाले के नोट्स में कोई ज्यादा फर्क होता है। एक ही कोचिंग से पढ़े छात्रों में कोई सफल होता है और कोई सफल नहीं होता है। ऐसे में ये ध्यान रखना चाहिए कि आप जो कुछ भी पढ़ रहे हैं उस पर आपका कांफिडेंस है कि नहीं। विषय आपको क्लियर हो रहे हैं कि नहीं। इसलिए दूसरों के नोट्स उतना ही जुटाएं जितना पढ़ सकें। वैसे अपना नोट्स सबसे अच्छा होता है। अगर आप खुद के नोट्स बनाएंगे तो इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता।

8-दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ना
मोर स्टडी मोर कंफ्यूजन। ये कहावत तो आपने सुनी होगी। अगर आप दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ रहे हैं तो आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। कोशिश करें सिर्फ दो न्यूज पेपर पढ़ें। जिसमें से एक हिन्दी और एक अंग्रेजी हो। सिर्फ वही पढ़ें जो परीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो।

9-असफल लोगों से सलाह लेना
असफल लोगों से बात जरुर करें लेकिन उनसे सलाह ना लें। बात करने से फायदा ये होगा कि आप ये जल्द समझ जाएंगे कि कहां पर गलती करने से ये लोग सफल नहीं हुए हैं। लेकिन अगर आप अफसल लोगों से सलाह लेंगे तो आपको बहुत नुकसान होगा। क्योंकि असफल इंसान अपनी गलती कभी नहीं मानता तो सिर्फ दूसरों पर सारी तोहमत मढ़ता रहता है। मतलब कमीशन में बेइमान लोग बैठे हैं। कोचिंग में ठीक से नहीं पढ़ाया गया। वगैरह-वगैरह।

10-खुद पर भरोसा नहीं करना
IAS की तैयारी का पहला मंत्र हैं खुद की तैयारी भरोसा रखना। अगर आप खुद पर यकीन नहीं करते तो आप तैयारी की सोचिए भी नहीं। क्योंकि ये परीक्षा ही नेतृत्व क्षमता की तलाश के लिए ली जाती है। और जो इंसान खुद पर कांफिडेंस नहीं है वो दूसरों का नेतृत्व कभी नहीं कर सकता है।

तो दोस्तों ये थी वो 10 गलतियां जिसे करने पर आप IAS की रेस से बाहर हो सकते हैं। इसलिए आज ही इन गलतियों से बचे। और हां। अगर आपको ये लेख पसंद आया हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें, ताकि जो लोग इस परीक्षा की तैयारी कर रहेे हैं उन तक सही मैसेज पहुंच सके। 

Tuesday, 11 July 2017

IAS Topper सौम्या पांडे ने बिना कोचिंग, कैसे IAS में टॉप किया? देखें उनकी कॉपी.

IAS की परीक्षा अपने आप में किसी हिमालय सरीखी चुनौती से कम नहीं है। जबतक कोई हिमालय पर चढ़ नहीं लेता उसे हिमालय दुनिया की सबसे कठिन चुनौती लगती है। लेकिन जो इस चुनौती से पार पा लेता है उसके लिए ये बाएं हाथ का खेल बन जाता है। ठीक इसी तरह से IAS का किला फतह करना भी बड़ी चुनौती है, लेकिन जब कोई एक बार इसमें सफल हो जाता है तो उसे ये परीक्षा बेहद आसान लगने लगती है।

Ad_Content IAS की तैयार के दौरान छात्रों के मन में एक सवाल सबसे ज्यादा चलता है कि निबंध की तैयारी वो कैसे करें? निबंध को लेकर जो सवाल सबसे ज्यादा टेंशन का सबब बनता है उसमें हैं...

1-निबंध की शुरुआत कैसे करें?
2-निबंध में कोटेशन दें की ना दें?
3-अगर निबंध में कोटेशन दे तो कहां दे?
4-निबंध में डायग्राम का प्रयोग करें की ना करें?
5-अगर निबंध में डायग्राम बनाएं तो कहां बनाएं, कितना बनाएं?
6-निबंध लिखने से पहले रफ वर्क करें, कितनी देर तक करें, रफ वर्क में क्या-क्या प्वाइंटर बनाएं?

अगर आप इन सभी सवालों का जवाब जानना चाहते हैं तो 2016 की IAS Topper सौम्या पांडे (SAUMYA PANDEY RANK-4) की निबंध की वो कॉपी जरुर देखिए जो उन्होंने VISION IAS कोचिंग में टेस्ट सीरिज के दौरान लिखा था। इस कॉपी को देखने के बाद आपको आसानी से इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कि आप निबंध की तैयारी कैसे करें?

IAS Topper SAUMYA PANDEY RANK-4 की निबंध की कॉपी देखने के लिये नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.


Thursday, 1 June 2017

IAS TOPPER नंदिनी की सफलता की पूरी कहानी

देश को एक बार फिर नया आईएएस टॉपर (IAS TOPPER) मिल गया है। इस बार इस टॉपर का नाम है नंदिनी केआर (Nandini KR, IAS TOPPER 2017)। ऐसा नहीं है कि नंदनी ने पहले प्रयास में UPSC में सफलता हासिल की है। इससे पहले वो 2014 में IRS के लिए सलेक्ट हुईं थीं। अभी वो फरीदाबाद के राष्ट्रीय सीमा-शुल्क, उत्पादन शुल्क व नारकोटिक्स अकादमी ( National Academy of Customs, Excise and Narcotics in Faridabad) में ट्रेनिंग ले रही हैं। अपने चौथे प्रयास में नंदिनी ने वो मुकाम हासिल किया जिसके सपने तो सभी देखते हैं लेकिन पहुंचता साल में सिर्फ एक है। 2016 में दिल्ली की टीना डाबी ने ये मुकाम हासिल किया था। 2015 में दिल्ली की दिव्यांग इरा सिंघल टॉपर बनीं थीं। जबकि 2014 में राजस्थान के गौरव अग्रवाल ने इस परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया था।

नंदिनी मूलरूप से दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के कोलार की रहनेवाली है। वहीं कोलार जो सोने की खान के लिए मशहूर है। 15 SEPTEMBER 1990 (27 साल) को पैदा हुई नंदिनी ने कोलार जिले से ही शिक्षा दीक्षा ली। उनके पिता रमेश सरकारी स्कूल में हाईस्कूल के टीचर हैं और मां गृहणी। नंदनी अति पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। सबसे खास बात ये है कि नंदिनी की बचपन की पढ़ाई कन्नड़ भाषा में हुई। लेकिन उन्होंने अपनी स्कूलिंग St. Joseph Convent Girls High School से पूरी की। नंदिनी ने कन्नड साहित्य से आईएएस परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया।  16 साल पहले कर्नाटक की रहनेवाली विजयलक्ष्मी बिदारी (Vijayalakshi Bidari) ने भी कन्नड साहित्य से IAS में पहली रैंक हासिल की थी।

नंदिनी की सफलता एक आम छात्र की सफलता है। वो कोई बचपन से टॉपर नहीं रहीं। लेकिन वक्त के साथ उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान दिया। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने बैंग्लुरू के prestigious M S Ramaiya Engineering College से Civil Engineering में B. Tech किया। इसके बाद कुछ दिनों तक उन्होंने कर्नाटक के PWD विभाग में सरकारी इंजीनियर की नौकरी की लेकिन उन्हें ये नौकरी रास नहीं आई। क्योंकि बचपन से ही उन्होंने सपना कुछ और करने का देखा था। वो सपना था IAS बनने का।

IAS की परीक्षा में नंदिनी को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। साल 2014 के दूसरे प्रयास में उनकी रैंकिंग 849 थीं। वो IRS (Customs and Central Excise) के लिए चुनी गईं। सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली की Vajiram and Ravi कोचिंग को ज्वाइन किया था। नंदिनी के मुताबिक कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सफलता का राज है। वो अपने माता-पिता को आपना आदर्श मानती हैं। नंदिनी का सपना है कि वो महिलाओं को सशक्त बनाने में अपना योगदान दे।  

NOTE:-अगर आपको आईएएस टॉपर नंदिनी की कहनी पसंद आई तो ज्यादा से ज्यादा संख्या में फेसबुक शेयर का बटन टबाएं।

Wednesday, 29 March 2017

IAS में सफल और असफल उम्मीदवारों की सोच में क्या फर्क होता है? जरुर पढ़ें

दोस्तों IAS हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा है. ऐसा इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि इस परीक्षा में सफल होनेवाले उम्मीदवारों का प्रतिशत बेहद कम है. चूंकि ये परीक्षा दुनिया की कठिनतम परीक्षाओं में नंबर वन है लिहाजा इसमें आने वाले सवाल भी उसी लेवल के होते हैं.


खासबात ये है कि प्रारंभिक परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक के सवाल देखने में जितने कठिन होते हैं उसके जवाब उतने ही आसान होते हैं. यकीन नहीं हो रहा हो तो IAS के इंटव्यू से जुड़े कुछ सवाल और उसके उत्तर नीचे आप देख सकते हैं.




आपके लिए सलाह ये है कि आप प्रश्नों को पढ़ते समय अपने मन में उसके उत्तर भी सोचते चलें और आखिर में नीचे दिए गए उत्तरों से अपने उत्तर मिलाएं. इससे आपको पता चल जाएगा कि आपकी सोच में और एक सफल IAS की सोच में क्या अंतर है?

1. IAS Question - आप किसी जिले के जिलाधिकारी हैं. आपके डिस्ट्रिक में दो ट्रेनें टकरा गईं. आपको खबर मिली. आप सबसे पहले क्या निर्णय करेंगे? (ये सवाल डिसिजन मेकिंग से जुड़ा है)
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2.IAS Question - आपकी इकलौती बहन की शादी है. वह शादी के 1 दिन पहले मेरे साथ भाग जाती है. आप क्या करेंगे? (आपके मूड को जांचने के लिए सवाल, मतलब आप असहज हालात में कैसा बर्ताव करते हैं.)
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3.IAS Question - आप जब 21 साल के हुए तो आपको अचानक एक दिन पता चला कि आपकी मां कॉलगर्ल रही है. आप का रियेक्शन क्या होगा? (आपके पेशेंस को जांचने के लिए प्रश्न)
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4.IAS Question - आपने जो घड़ी पहनी है उसकी कीमत 250 रुपए मात्र है और मैंने जो घड़ी पहनी है उसकी कीमत 1 लाख है तो इससे क्या साबित होता है? जबकि दोनों घड़ी टाइम एक ही बताती है.

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1. Candidate Answer - सवाल सुनकर आपका दिमाग घूम गया होगा. किसी का भी घूम जाएगा. लेकिन एक सफल और असफल उम्मीदवार में अंतर ये है कि वो इन सवालों का जवाब बहुत ही सधे हुए शब्दों में देता है. पहले सवाल का जवाब सफल कैंडिडेट ने ये दिया था "श्रीमान सबसे पहले मैं ये पता करुंगा कि ट्रेन पैसेंजर थी या फिर मालगाड़ी. देखिए इतना कहते ही सवाल यहीं पर खत्म हो गया. क्योंकि ट्रेन अगर पैसेंजर है तो बहुत ज्यादा नुकसान होेने की संभावना है। इसके लिए भारी बचाव कार्य करना पड़ेगा और फौरन बड़ा निर्णय लेना पड़ेगा. और अगर दोनों मालगाड़ी है तो जानमाल का नुकसान कम होगा.
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2. Candidate Answer- दूसरे सवाल के जवाब में सफल उम्मीदवार ने कहा कि सर मुझसे ज्यादा खुश किस्मत कौन होगा कि मेरी बहन ने एक IAS को जीवन साथी चुना है और दूसरा वो मेरा होनेवाला सीनियर है।
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3. Candidate Answer- तीसरे प्रश्न में आपका हाव-भाव बदल सकता है। लेकिन अगर आप समझदार हैं तो इसका सवाल भी बेहद सधे हुए शब्दों में दे सकते हैं। सफल उम्मीदवार इसका जवाब कुछ इस अंदाज में देगा। सर अगर मेरी मां ने कॉलगर्ल का काम मजबूरी में किया तो मैं उसके साथ हूं साथ ही ये जानकर मैं अच्छा महसूस करुंगा कि मेरे पिता मेरी मां के अकेले ग्राहक रहे हों.

4. Candidate Answer- आखिरी सवाल का जवाब जबाब आपको IAS बना सकता है. सफल उम्मीदवार ने जवाब दिया कि श्रीमान आपकी 1 लाख की घड़ी आपका समय बता रही है यानी आपका समय अच्छा चल रहा है, जबकि मेरी मात्र 250 रुपए की घडी मेरा वक्त बता रही है. मतलब मेरा समय खराब चल रहा है.


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Thursday, 9 March 2017

IAS मे निशांत जैन ने हिन्दी माध्यम से कैसे टॉप किया? Tips By IAS Nishant Jain

दोस्तों IAS बनना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। ये वो बातें हैं जिसे सिर्फ वही आपको बता सकता है जो इस परीक्षा में सफल हो चुका है। मतलब साफ है अगर आपको अमेरिका जाना है तो आपको वहां जाने का सही रास्ता वही बता सकता है जो वहां तक कभी गया हो। जो कभी अमेरिका गया ही नहीं वो आपको सिर्फ वहां तक पहुंचाएगा जहां तक वो गया है। उसके बाद वो आपको राम भरोसे छोड़ देगा यानी आप खुद से वहां पहुंच गए तो आपकी किस्मत वर्ना वापस जहां थे वहां तो खुद पहुंच ही जाएंगें।

इसी तरह से कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाने वाले टीचर्स भी आपको वहीं तक पहुंचाएंगे जहां तक वो खुद गए हैं। मतलब अगर वो इंटरव्यू तक पहुंचे हैं तो वो आपको इंटरव्यू तक ही पहुंचाएंगे। अगर मेंस तक की परीक्षा उन्होंने पास की है तो वो आपको मेंस तक पहुंचा देंगे। इसके बाद आपकी किस्मत है कि आप IAS का किला कैसे फतह करते हैं?
IAS के नए और पुराने परीक्षार्थियों  के लिए हिन्दी माध्यम से IAS Topper निशांत जैन ने एक किताब लिखी है। इस किताब में विस्तार से उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है। नीचे हम उन्हीं के किताब का कुछ अंश दे रहे हैं। साथ ही किताब का Link भी नीचे दिया गया है। आप चाहें तो इस किताब को मंगा कर पढ़ सकते हैं। हो सकता है कि इस किताब को पढ़ने के बाद किसी कोचिंग से मदद लेने की आपको जरुरत ही ना पढ़े। ये किताब उन छात्रों के लिए बहुत काम की हो सकती है जो दिल्ली आकर महंगी कोचिंग नहीं कर सकते हैं। नीचे हम निशांत जैन की किताब का छोटा-सा अंश दे रहे हैं उसे पढ़कर आप समझ सकते हैं कि ये किताब कितनी प्रैक्टिकल है?

How to become IAS in Hindi? How to face IAS Interview in Hindi? IAS ke Interview mei kaise sawal aate hain? IAS ke question kaise hote hain. IAS tips by topper Nishant Jain
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क्या है इंटरव्यू (Interview) (व्यक्तित्व परीक्षण)?

UPSC की सिविल सेवा परीक्षा का इंटरव्यू दिल्ली स्थित UPSC के भवन में होता है। आपका इंटरव्यू इस हेतु गठित विभिन्न इंटरव्यू बोर्डों में से किसी एक द्वारा लिया जाता है। प्रत्येक इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य होते हैं। प्रत्येक इंटरव्यू बोर्ड में आम तौर पर एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं।
इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष लोक सेवाओं में करियर के लिए अभ्यर्थियों की उपयुक्तता (suitability) की जाँच की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी होती है। 
मेरी समझ में इंटरव्यू बोर्ड यह जानने कि 'आप कितना जानते हैं?' से ज़्यादा यह जानना चाहता है कि आपके व्यक्तित्व कैसा है और आप कैसे सोचते हैं? कैसे व्यवहार करते हैं और आप कितना सीखना चाहते हैं यानी आपको ट्रेनिंग दी जा सकती है या नहीं? इंटरव्यू बोर्ड आपकी बौद्धिक योग्यताओं के साथ-साथ आपके सामाजिक-व्यावहारिक गुणों की परख भी करना चाहता है। ऐसे कुछ गुणों या विशेषताओं में, मानसिक सतर्कता, स्पष्ट एवं तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति, संतुलित दृष्टिकोण, नेतृत्व कौशल, नैतिक सत्यनिष्ठा, समालोचनात्मक विश्लेषण, सामान्य रूचि के विषयों और रोज़मर्रा की घटनाओं के प्रति उत्सुकता और जागरूकता जैसी विशेषताएँ शामिल हैं। 
इसके साथ ही उम्मीदवार की भाषा, शब्दों के चयन और धैर्य की भी परीक्षा की जाती है। मेरी समझ में, किसी भी श्रेष्ठ अभ्यर्थी में परिपक्वता, तार्किकता, विनम्रता, संचार कौशल, संचित ज्ञान का विस्तृत और व्यापक आधार, सकारात्मकता, प्रत्युत्पन्नमतित्व (presence of mind), व्यापक और संतुलित व्यावहारिक दृष्टिकोण जैसे गुणों का एक ठीक-ठाक विकसित स्तर होना चाहिए।

मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी

पहली बात तो यह कि मुख्य परीक्षा देने के तुरंत बाद यदि आपको सकारात्मक रिज़ल्ट कि थोड़ी भी उम्मीद है तो आप इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर दें। यह भी ध्यान दें कि हड़बड़ाने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपको मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू तक इंटरव्यू की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। मुख्य परीक्षा देने से पहले तो इंटरव्यू की तैयारी की चिंता बिलकुल न करें।

आइए, संक्षेप में चर्चा करते हैं इंटरव्यू की समग्र तैयारी के बारे में-

  • सबसे पहले अपना विस्तृत आवेदन पत्र (DAF) देखें, जो आपने मुख्य परीक्षा के लिए भरा था। इंटरव्यू बोर्ड को आपके बारे में जो कुछ भी जानकारी होती है, उसका स्त्रोत आपका DAF ही होता है। अतः DAF के अनुरूप तैयारी का ख़ाका तैयार कर लें (जहाँ तक मुख्य परीक्षा के पूर्व DAF भरने का प्रश्न है, तो उसके बारे में चर्चा इसी किताब के अन्य अध्याय -'कैसे करें मुख्य परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन' में की गयी है।
  • DAF में आपके नाम, पता, गृह राज्य, शैक्षिक और तकनीकी योग्यता, अनुभव, रूचियों, वैकल्पिक विषय, सर्विस और कैडर की प्राथमिकताओं समेत अनेक जानकारियाँ होती हैं। जब आप मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी करें, तो DAF में उल्लिखित जानकारियों यानी अपने बायोडाटा के प्रत्येक बिन्दु पर ठीक से तैयारी कर लें। इस ख़ाली समय का लाभ उठाते हुए एक छोटी सी डायरी बना लें, और उसमें DAF में उल्लिखित आपकी जानकारियों से सम्बंधित सम्भावित सवाल और उनके जवाब सोचने की कोशिश करें। आपके बायोडाटा से पूछे जा सकने वाले सवालों की लम्बी रेंज हो सकती है और आप ऐसे दर्जनों सवालों के बारे में सोच सकते हैं। आपके नाम के अर्थ से लेकर गृह ज़िले और गृह राज्य की विशेषताओं और समस्याओं तक, एजूकेशनल क्वालिफ़िकेशन से जुड़े ज्ञान से लेकर वैकल्पिक विषय से जुड़े प्रासंगिक मुद्दों तक, पूछे जा सकने वाले सवालों की एक लम्बी रेंज हो सकती है।
  • DAF में लिखी गयी ख़ुद की रूचियों से पूछे जा सकने वाले सवालों को लेकर अभ्यर्थी काफ़ी सशंकित रहते हैं। पहली बात तो यह कि आवेदन पत्र में वे रूचियाँ (Hobbies and interests) ही भरें, जो आपके व्यक्तित्व से सचमुच जुड़ी हों या आप पहले उनसे जुड़े रहे हों। ऐसी बहुत सी अभिरुचियाँ हो सकती हैं, जैसे- कोई खेल खेलना, किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, फ़िल्में देखना, योग-ध्यान करना, कविताएँ लिखना आदि। आपने जिन एक या दो रूचियों का ज़िक्र अपने DAF में किया है, उनसे जुड़े सवालों के लिए प्रोपर तैयारी कर लें। उसके बारे में कुछ पढ़ भी लें, बल्कि मैं तो कहूँगा कि इंटरव्यू की तैयारी के दौरान रोज़ एकाध घंटा उस हॉबी को जियें भी। तभी आप उस हॉबी की गहराई से ख़ुद को जोड़ पाएँगे और इंटरव्यू में सहज रहेंगे।
  • इंटरव्यू की तैयारी का एक और बड़ा पक्ष है, करेंट अफ़ेयर्स और उससे सम्बंधित मुद्दे। चूँकि इंटरव्यू बोर्ड आपके विचार और वैचारिकी जानना चाहता है, पर उसके लिए कोई ऐसा मुद्दा या विषय चाहिए, जिस पर दोनों पक्ष बात कर सकें। करेंट अफ़ेयर्स इस दृष्टि से काफ़ी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस संदर्भ में इंटरव्यू से एक महीने पहले तक का घटनाक्रम और उससे जुड़े मुद्दे अति महत्वपूर्ण होते हैं। आपसे इन मुद्दों पर आपकी राय पूछी जा सकती है। अतः इस खंड की तैयारी के लिए मेरी सलाह है कि एक डायरी बनाकर उस दौरान के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के बहुत संक्षिप्त नोट्स तैयार कर लें। 
  • यूपीएससी परीक्षा के इंटरव्यू की तैयारी के दौरान आस- पास के माहौल के प्रति अवेयर रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप रेडियो, टीवी, न्यूजपेपर, पत्रिकाएँ और इंटरनेट की मदद ले सकते हैं। सभी माध्यमों का प्रयोग करके उन्हें एकीकृत करने की कोशिश करें।
  • आपसे कुछ विवादास्पद मुद्दों पर भी आपकी राय पूछी सकती है। जैसे-शराबबंदी की नीति उचित है या नहीं? क्या समलैंगिकता अनैतिक है? क्या पिछले दिनों भारत में असहिष्णुता बढ़ी है? आदि। ऐसे मुद्दों के पक्ष-विपक्ष दोनों नोट कर लें और फिर एक निष्कर्ष सोचें। निष्कर्ष जो भी हो, मेरी समझ में प्रगतिशील, सकारात्मक हो और अतिवादी प्रतीत नहीं हो, तो बेहतर है।
  • कोशिश करें कि इंटरव्यू देने से पहले कुछ मॉक इंटरव्यू जरूर दे दें, क्योंकि इससे आपकी वे कमियां सामने आ जाती हैं, जो आपको खुद भी पता नहीं होतीं। बेहतर होगा कि आप अपनी जिंदगी का पहला इंटरव्यू यूपीएससी में ही फेस ना करें। यद्यपि ऐसे भी कुछ अभ्यर्थियों में इंटरव्यू में अच्छे अंक हासिल किए हैं जिन्होंने एक भी मॉक इंटरव्यू नहीं दिया।
  • मॉक इंटरव्यू देने का एक और बढ़िया तरीक़ा है कि आप तीन-चार दोस्त एक ग्रुप बनाएँ और दो-तीन साथी मिलकर चौथे साथी का इंटरव्यू लें। इस तरह इंटरव्यू की तैयारी बंद कमरे तक न रखकर ग्रुप डिस्कशन और मॉक इंटरव्यू का भरपूर अभ्यास करते हुए करें।
  • इस बात का भी ख्याल रखें कि अगर मॉक इंटरव्यू लेने वाले ने आपमें कोई बड़ी कमी बता देता है, तो उसे बहुत ज्यादा दिल पर लेकर अपना कॉन्फिडेंस लूज ना करें और उसमें सुधार करने की कोशिश करें। हो सकता है मॉक इंटरव्यू लेने वाले की दृष्टि में आपकी कमी बड़ी हो, पर UPSC इंटरव्यू बोर्ड उस कमी को महत्व न दे।

इंटरव्यू के ठीक पहले

इंटरव्यू के ठीक पहले कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें-
  • फ़ॉर्मल ड्रेस तैयार है या नहीं। पुरुषों के लिए हल्के रंग की शर्ट और काली या डार्क कलर की पैंट, टाई और काले फ़ॉर्मल जूते पहनना अच्छा विकल्प है। इसी तरह महिला अभ्यर्थियों के लिए हल्के डिज़ाइन की साड़ी या सलवार-सूट बेहतर है। पुरुष हों या महिला अभ्यर्थी, ड्रेस में शालीनता और औपचारिकता दिखनी चाहिए।
  • पहले दिन सहज रहें। ज़्यादा पढ़ाई का तनाव न लें। यदि आख़िरी वक़्त पर कोई नयी सलाह दे, तो ज़्यादा प्रभावित न हों। कुछ लोग आपसे ठीक एक दिन पहले यह भी पूछेंगे कि क्या तुमने फ़लाँ टॉपिक तैयार कर लिया? यदि आपने वह टॉपिक तैयार नहीं भी किया तो तनाव न लें। ज़रूरी तो नहीं कि वही सवाल इंटरव्यू में पूछा जाए। नकारात्मक बातें करने वालों से इस दौरान दूरी बनाए रखें।
  • भरपूर नींद लें और सुबह तरोताज़ा उठें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और हल्का व सुपाच्य भोजन ज़रूर लें। ब्रेकफ़ास्ट को अनदेखा न करें।
  • अगले दिन इंटरव्यू हेतु UPSC द्वारा जो-जो प्रमाणपत्र माँगे गए हैं, उन्हें क़ायदे से सम्भाल कर रख लें। अन्यथा आख़िरी क्षण में या UPSC के भवन में हड़बड़ी और घबराहट हो सकती है।

इंटरव्यू बोर्ड के सामने

इंटरव्यू दो शिफ़्टों में होते हैं, सुबह और दोपहर बाद। जब आप संघ लोक सेवा आयोग के दिल्ली स्थित मुख्यालय में इंटरव्यू देने जाते हैं, तो सबसे पहले आपके मूल दस्तावेज़ों (जो माँगे गए हैं), उनकी जाँच होती है। अंतिम वक़्त के ऊहापोह से बचने के लिए दस्तावेज़ ठीक से व्यवस्थित करके ले जाएँ। बोर्ड के सम्मुख आपका इंटरव्यू शुरू होने से कुछ देर पहले आपको एक हॉल में आपकी टेबिल पर बैठाया जाता है, जहाँ कुछेक अभ्यर्थी और भी होते हैं। उनसे बहुत ज़्यादा डिस्कशन के चक्कर में न पड़ें, हाँ, सहज होने के लिए परिचय और मुस्कानों का आदान-प्रदान कर लें। ये क़तई न सोचें, कि यह अमुक अभ्यर्थी कितना क्वालिफ़ाइड है और मुझे तो इसकी अपेक्षा कुछ नहीं आता।

अब बारी आती है आपके इंटरव्यू की। 

  • कक्ष में प्रवेश करें और अनुमति लेकर सहज रूप से बैठ जाएँ। न तो ज़्यादा झुकें और न ही ज़्यादा अकड़ कर बैठें।
  • इंटरव्यू को फेस करते वक्त आपका माइंडसेट बहुत ज्यादा स्टीरियोटाइप या बहुत ज्यादा मैकेनिकल नहीं होना चाहिए। सहजता जरूर होनी चाहिए। यू आर वॉट यू आर। इसलिए आप जैसे हैं, वैसे जाएं और सहजता के साथ जाएं।
  • इस बात का खास ख्याल रखें कि इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर्स को ब्लफ करने या बहकाने की बिल्कुल कोशिश ना करें। वे बहुत ही अनुभवी लोग होते हैं। उनको किसी बात की गलत जानकारी देकर आगामी सवालों में फँस सकते हैं।उनका इस मामले में एक्सपीरियंस काफी लंबा होता है। दिखावा न करें, सहज रहें।
  • ध्यान रहे कि सवालों का जवाब देते समय एक संतुलित अप्रोच अपनाएं।
  • एक बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरव्यू बोर्ड के जो भी सदस्य आपसे सवाल पूछ रहे हैं, उनके सवाल को ध्यानपूर्वक और धैर्य के साथ सुनें। यदि आप सवाल समझ नहीं पाए हैं तो आप विनम्रतापूर्वक दोहराने का आग्रह कर सकते हैं। कृपया सवाल पूरा होने से पहले उत्तर देना शुरू करने की भूल क़तई न करें।
  • विनम्रता का गुण इंटरव्यू के दौरान बहुत काम आता है। विनम्रता का गुण सचमुच अमूल्य है। पर अतिशय विनम्रता दीनता न बन जाए, इसका भी ध्यान रखें।
  • यदि किसी सवाल के बारे में कोई भी आइडिया या क्लू नहीं लग रहा है, तो विनम्रतापूर्वक स्वीकार लें कि आपको इस मुद्दे की जानकारी नहीं है। पर यदि अपनी थोड़ी-बहुत समझ है, तो बोर्ड की अनुमति लेकर उत्तर देने की कोशिश करें। कहने का अर्थ है कि एकदम से give up न करें।
  • इंटरव्यू के दौरान आप स्पष्ट आवाज़ में बोलें। न बहुत तेज़ और न बहुत धीमी। और हाँ, किसी उत्तर के जवाब में अति उत्साहित न हो जाएँ। नर्वस तो बिलकुल न हों। ऐसे अनेक अभ्यर्थी होते हैं, जिन्हें इंटरव्यू के दौरान लगता है कि उनका इंटरव्यू ठीक नहीं चल रहा है, पर बाद में परिणाम आने पर उन्हें अच्छे अंक प्राप्त हो जाते हैं। अतः हल्की सी मुस्कान बनाए रखें।  

(मेरी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' से कुछ चुनिंदा अंश)
-शुभकामनाओं सहित- निशान्त

NOTE:-दोस्तों अगर आपको निशांत सर का ये प्रयास अच्छा लगा तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। अगर आप किसी ऐसे फेसबुक ग्रुप से जुड़े हैं तैयारी करने वाले छात्रों का समूह है तो उसमें इसे जरुर शेयर करें। 

IAS निशांत जैन की किताब आप यहां से मंगा सकते हैं। शानदार किताब है। आज के परिवेश में तैयारी के लिए हिन्दी माध्यम के छात्रों के लिए इससे अच्छी कोई किताब हो ही नहीं सकती। सुझाव है जरुर पढ़ें.


Sunday, 12 February 2017

IAS बनना है तो कुछ आदतें बदल लें, जानें क्या हैं वो आदतें.

IAS PREPARATION TIPS FOR BEGINNERS IN HINDI

IAS हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा है. लिहाजा इसे पास करने के लिए पूरी Planning के साथ तैयारी की जरुत है. समझने की जरुरत ये है कि Planning कैसे बनाएं? सबसे पहले दुनिया की इस सबसे कठिन परीक्षा को परीक्षा ना मानकर एक Game समझें.

जिस तरह से किसी भी Game को खेलने से पहले उसके Rules को जानना और समझना बेहद जरुरी ठीक उसी तरह से IAS की तैयारी से पहले उसके सभी Rules को जानना और उसे अच्छी तरह से समझना बहुत जरुरी है.
IAS topper Tina dabi tips

सोचिए अगर Cricket के Game में कोई Batsman बिना Cricket के Rules & Regulation को पूरी तरह से समझे मैदान में उतर जाए तो उसका क्या होगा? अगर वो ये जानता ही नहीं कि पैड पर बॉल लगने पर भी वो ऑउट हो सकता है तो उसके आउट होने के चांसेज बढ़ जाएंगे. और आउट होने के बाद वो यहीं कहेगा कि अंपायर ने बेइमानी की है. ठीक वैसे ही जैसे असफल होने के बाद तमाम छात्र कहते हैं कि UPSC Commission ने बेईमानी की है. खासतौस से हिन्दी मीडियम के छात्रों के जुबान पर तो ये शब्द चढ़ चुका है कि कमीशन हिन्दी मीडियम वालों के साथ भेदभाव करता है.

तैयारी की रणनीति समझने से पहले एक छोटे से सवाल का जवाब दीजिए. आप में से कितने ऐसे हैं जो IAS का Notification और Form भरने से पहले अच्छी तरह से पूरा पढ़ते हैं. जवाब आप खुद जानते हैं. हकीकत यहीं है कि 100 में से सिर्फ 3 लोग यानी 3% छात्र इसे इत्मीनान से पढ़कर IAS Form भरते हैं. और मजेदार बात तो है कि सफल होनेवालों का प्रतिशत इससे भी कम है. और जब से IAS का Form Online भरने की व्यवस्था हुई है तब से पूछिए ना. कई जनाब तो ऐसे हैं जिनका फॉर्म ही दूसरे भरते हैं. है ना मजेदार. जो खुद फॉर्म नहीं भर सकते वो खुद एक्जाम कैसे पास करेंगे?
ias topper tips in hindi

एक बात गांठ बांध लीजिए अगर IAS बनना है तो किसी भी Rules and Regulation को ध्यान से पढ़ने और उसे समझने की आदत आज से ही डाल लीजिए क्योंकि एक IAS अपनी पूरी जिंदगी में या तो Rules and Regulation को Follow करता है या फिर Rules and Regulation बनाता है. इससे अलग उसके पास कोई काम नहीं होता. यकीन नहीं हो रहा है, लेकिन सच यहीं है.

अच्छा बताइए आपके जिले का जिलाधिकारी (District Magistrate) क्या करता है? किसी विभाग का सचिव क्या करता है? प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव क्या करते हैं? सीधा जवाब है या तो वो नियम बनाते हैं या फिर नियम को लागू करते या कराते हैं.

समझे कुछ आप. यानी अगर आपको IAS बनना है तो अभी से कुछ आदतें डालनी होगीं. सबसे पहली आदत है-

1-किसी भी काम को करने के लिए Rules बनाना और उसे Follow करना-

छोटा-सा उदाहरण लीजिए. अगर आप Time Table (टाइम टेबल) से पढ़ने की प्लानिंग कर रहे हैं तो पहले टाइम टेबल बनाइए फिर उसे अमल में लाइए. अगर आप इसमें Fail हैं तो निश्चितौर से आप में वो गुण नहीं है जो एक IAS में होने चाहिए? क्योंकि कल जब आपको अपने जिले में Rules लागू करने होगें तो आप उसमें भी Fail होंगे. क्योंकि ये आपका स्वभाव है. और स्वभाव को बदलना बहुत मुश्किल होता है. जैसे-कुत्ते की पूछ सालों लोहे की नली में डाल दो लेकिन वो सीधी नहीं होती. 

2-हर बात पर किसी से भी सलाह मश्विरा करना:-

ये मानव स्वभाव है कि किसी भी काम को करने से पहले इंसान उसके हर पहलू के बारे में सोचता है. नफे-नुकसान के बारे में समझता है. ठीक इसी तरह से तैयारी से पहले तमाम छात्र इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उन्हें तैयारी करनी चाहिए या नहीं? तैयारी को लेकर उनका फैसला सही है या नहीं? वो जिस कोचिंग को करने की सोच रहे हैं वो सही या फिर नहीं? तमाम तरह के ऐसे सवाल हैं जिसके लिए वो ऐरे-गैरे से लेकर नत्थु-खैरे तक से सलाह लेते हैं. 

अच्छा बताइए कि अगर आपको अमेरिका जाना है तो आप किसे सलाह लेंगे. उससे जो अमेरिका जा चुका है? उससे जो कनाडा तक सिर्फ गया है? उससे जो सिर्फ किताबों में पढ़कर अमेरिका जाने का अहसास कर चुका है? या फिर उससे जो अमेरिका गए अपने दोस्तों से जानकारी लेकर लंबी-लंबी डींगे हाकता है. निश्चिततौर पर उससे जानकारी लेना फायदेमंद है जो अमेरिका जा चुका है. क्योंकि वो आपको सफर में आनेवाली दिक्कतों का प्रैक्टिल और सटीक जवाब दे सकता है. तो अगर आपको सलाह लेना है तो सफल लोगों से ही लें क्योंकि वो आपको तैयारी में आनेवाली हर परेशानियों को सही और प्रैक्टिकल जवाब दे सकते हैं.

3-दूसरों के नोट्स के पीछे भागना बंद कीजिए, चाहे वो IAS में सफल ही क्यों ना हो चुका हो-


ये बताइए कि 4 फीट के इंसान को 7 फीट के इंसान का जूता फिट हो सकता है क्या? इंसान तो दोनों ही हैं. निश्चिततौर पर नहीं. लेकिन 4 फीट का इंसान 7 फीट का जूता पैर में डालकर और 7 फीट का इंसान 4 फीट के इंसान के जूते की नाप के आधार पर ये जान सकता है कि उसे किस नंबर का जूता फिट बैठ सकता है. ठीक इसी तरह से दूसरे के नोट्स को लेकर उसी से पढ़ेंगे तो नतीजा क्या होगा बताने की जरुरत नहीं? हां इतना कर सकते हैं कि दूसरे के नोट्स देखकर आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि आप अपने नोट्स कैसे बनाएं? क्योंकि नोट्स में हर छात्र वही बात लिखता है जो उसे पता नहीं होता. 

जैसे किसी के नोट्स में अगर लिखा है कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले एक राज्य के मुख्यमंत्री थे? इसका मतलब ये है कि जिस भी छात्र ने ये नोट्स बनाया है उसे ये पहले से पता है कि नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे? लेकिन अब एक नया छात्र आता है उसे वहीं नोट्स पढ़ने को मिलता है और वो ये नहीं जानता कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजारत में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके थे तो आधा तथ्य याद करेगा? और जब परीक्षा में ये सवाल आएगा कि नरेद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले कहां के मुख्यमंत्री थे तो निश्चिततौर पर या तो वो सवाल गलत करेगा या फिर तुक्का मारेगा? आपको समझाने के लिए हमने ये आसान सवाल लिया, लेकिन जब यहीं सवाल अकबर से लेकर शिवाजी तक के बारे में आयेगा तब आपाके दिमाग की बत्ती घूम जाएगी. 

तो अगर सफल होना है तो आदत बदलिए, दूसरे के नोट्स लीजिए उसे एक बार पूरा पढ़िए और फिर रद्दी की टोकरी में फेंककर अपने खुद के नोट्स बनाइए. नहीं तो कमीशन आपको रद्दी की टोकरी में फेंकने से गुरेज नहीं करेगा.vijay agrawal 
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