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Wednesday, 11 April 2018

50 दिन में IAS अधिकारी कैसे बने? How to become an IAS officer in 2018 In Hindi?

IAS Exam 2018 की तैयारी कर रहे छात्र IAS Application form 2018 भरने के बाद तैयारी में जुड़े हैं। कुछ छात्र ऐसे हैं जो अभी तक ये तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें इस बार परीक्षा देनी है कि नहीं। लेकिन कुछ ऐसे हैं जिन्हें ये परीक्षा देनी ही है। ऐसे लोगों को सलाह है कि वो UPSC syllabus 2018 बार-बार देखते रहे। चूंकि आपको पता है कि इस बार IAS Exam Date 3 June (तीन जून) है। लिहाजा अब आपके पास समय बहुत ही कम बचा है। मोटे तौर पर देखा जाए तो आपके पास सिर्फ 50 दिन ही बचे हैं। इन 50 दिनों में आप कैसे तैयारी करें कि IAS बन जाए उसके लिए आप खुद से रणनीति बनाएं। आपकी रणनीति में मदद के लिए Shiva Thakur Shiva ने भी फेसबुक पर कुछ Tips & Trick for IAS Exam दी है। सर ने बताया है कि 50 दिन में IAS बनने के लिए कैसे रणनीति बनाई जाए। 50 Days mei IAS Addikari Kaise Bane?

How To Clear IAS Exam 2018 and Become an IAS Officer?

Civil Services Exam Pattern (UPSC IAS Exam Pattern 2017-18) तो अभी तक आप समझ ही चुके होंगे। क्योंकि अगर अभी तक आपको IAS परीक्षा का पैटर्न समझ में नहीं आया है तो आपको सलाह दी जाती है कि इस बार आप परीक्षा में ना बैठ। अपना Attempt खराब ना करें। Exam Pattern समझने के बाद बात आती है IAS Preparation की। इसके लिए आप IAS Syllabus को गीता की तरह हमेशा अपने पास रखें। इसका फायदा ये होगा कि आप व्यर्थ के भटकाव से बचेंगे। बहुत ज्यादा Study Material के चक्कर में भी ना पड़ें। पूर्व अनसॉल्व से IAS Exam Questions का देखते रहे हैं।

नीचे हम आपको Shiva Thakur Shiva सर की पोस्ट का वो हिस्सा डाल रहे हैं जिसमें सर ने बताया है कि कोई 50 दिन में कैसे आईएएस का किला फतह कर सकता है। हम सर की पोस्ट हू-ब-हू पोस्ट कर रहे हैं ताकि आप उसे बढ़कर अपनी तैयारी में शामिल कर सके।

How to become an IAS Officer in Hindi? 

IAS अधिकारी कैसे बने?



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Shiva Thakur Shiva

I.A.S #preliminary examination .#2018.....

...अंतिम 50दिनों में सटीक #रणनीति ..part -1....#shivu ...

..मित्रों ..प्रारम्भिक परीक्षा के लिये अब लगभग 50दिन शेष है ..और निश्चय ही अब आपकी #गम्भीरता चरम पर होगी ...मैं इस भाग में दो #बिंदुओं की चर्चा करूंगा ...
दोस्तों ..
..-1-.अभी तक जो भी आपनें #परम्परागत ज्ञान हासिल किया है उसे एक वर्ष तक के चर्चा में रहे मुद्दों से #अँतर्सम्बँधित करना शुरू कर दे ...मैं आपको करेंट #अफेयर्स के टॉपिक बता देता हूँ ..upsc किन टॉपिक्स पर ज्यादा प्रश्न पूछता है ....
....टॉपिक्स ...
.1-macro economic policy 
2-Science and technology 
3-Environment /ecology 
4--Government schemes and welfare policies 
5--Art and culture /modern history 
6--Polity 
7--international organization /reports and index ...
..दोस्तों ये टॉपिक्स हो गये आपके करेंट अफेयर्स के ..
दूसरा बिंदु है ..जो की सबसे महत्वपूर्ण है ...इन 50दिनों में जितना हो सके उतना क्वेस्चन्स सॉल्व कीजिए ..इसके लिये आप ..drishti the vision 
2-Vision i.a.s 
3-Insight 
4..i.a.s baba ..
इत्यादि के टेस्ट सीरीस पर अभ्यास करें ..
...दोस्तों ..आईएएस पीटी पास करने के लिए प्रैक्टिस का कोई विकल्प नहीं क्योँकि पीटी की बड़ी समस्या कन्फूयजन है जो प्रैक्टिस से ही दूर हो सकती है.आप किसी भी इंस्टीट्यूट के टेस्ट खूब सॉल्व कीजिए .बशर्ते वो प्रमाणिक हो ..अधिक से अधिक प्रश्नों पर #आभ्यास करे 
...--धन्यवाद ...#shivu .......

Saturday, 31 March 2018

IAS Preliminary Exam Syllabus 2018

G.S Paper-II (CSAT) was only a qualifying paper and minimum qualifying marks of 33% required from 2015.
 (साल 2015 से सामान्य अध्ययन-2 का पेपर सिर्फ क्वालिफाइंग है। इस पेपर को पास करने के लिए परीक्षार्थी को मिनिमम 33 फीसदी अंक लाना जरूरी है। नीचे हम आपको IAS 2018 Pre Exam Syllabus दे रहे हैं आप उसे देख सकते हैं।)

The UPSC Preliminary Examination shall comprise two compulsory papers of 200 marks each.

Paper I - (200 marks) Duration : Two hours

  • Current events of national and international importance.
  • History of India and Indian National Movement.
  • Indian and World Geography - Physical, Social, Economic Geography of India and the World.
  • Indian Polity and Governance - Constitution, Political System, Panchayati Raj, Public Policy, Rights Issues, etc.
  • Economic and Social Development Sustainable Development, Poverty, Inclusion, Demographics, Social Sector initiatives, etc.
  • General issues on Environmental Ecology, Bio-diversity and Climate Change - that do not require subject specialization.
  • General Science.

Paper II- (200 marks) Duration: Two hours

  • Comprehension
  • Interpersonal skills including communication skills;
  • Logical reasoning and analytical ability
  • Decision-making and problem-solving
  • General mental ability
  • Basic numeracy (numbers and their relations, orders of magnitude, etc.) (Class X level), Data interpretation (charts, graphs, tables, data sufficiency etc. - Class X level).

Wednesday, 31 January 2018

जीन अभियांत्रिकी क्या है? इस टॉपिक से कैसे बनते हैं सवाल?

जीन अभियांत्रिकी (अनुवांशिकी अभियांत्रिकी)

जब किसी जीव के जीन में कृत्रिम परिवर्तन कर उसी के अनुरूप उसके लक्षण में परिवर्तन किया जाता है तो यह प्रयोगशाला तकनीक जीन अभियांत्रिकी कहलाती है. इस तकनीकी में D.N.A या जीन को काटने के लिए रेस्ट्रिक्शनएन्जाइम तथा जीन को जोड़ने के लिए लाइगोज एन्जाइम प्रयुक्त किये जाते हैं.

Question:-

आज-कल मधुमेह रोगियों के लिए इन्सुलिन का इंजेक्शन प्राप्त किया जाता है-
(A) गाय से
(B) चूहा से
(C) सूअर से
(D) बैक्टीरिया से
ANSWER-बैक्टीरिया से

Important Fact for EXAM:-

इंसुलिन का उपरोक्त उत्पादन ट्रांसजेनिक तकनीकी की सहायता से कोलीफार्म बैक्टीरिया द्वारा किया जाता है. इस व्यापारिक इंसुलिन को ह्यूमुलिन (Humulin) की संज्ञा दी गई है. इसी प्रकार आजकल ट्रांसजेनिक तकनीकी की सहायता से-
v  ट्रांसजनिक पशु व फसलों का विकास किया जाता है.
v  फसलों को कीटरोधी (उदाहरण-बी.टी कॉटन) तथा प्रतिकूल वातावरण रोधी बनाया जाता है.
v  खाद्य-टीका का उत्पादन किया जाता है.
v  अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए ट्रांसजेनिक बैक्टिरिया Bugs तथा  Super Bugs क्रमशः प्लास्टिक पेट्रोलियम जैसे रसायनों को विघटित करने में समर्थ होते हैं.
v  जैव विघटनशील प्लास्टिक का उत्पादन किया गया है जिसे बायोपोल की संज्ञा दी गई है.
v  मकड़ियों द्वारा जाले के निर्माण में श्रावित पदार्थ को ट्रांसजेनिक तकनीक से अतिकठोरता प्रदान करने का परीक्षण किया गया है जिसे बायोस्टील की संज्ञा दी गई है.
v  जैव ऊर्वरक या बायो फर्टिलाइजर, जैव पीड़कनाशी, जैव कीटकनाशी इत्यादि का उत्पादन किया जाता है.

जैव उर्वरक (Bio Fertilizer)
जीव कोशिकाओं से प्राप्त ऐसे जैव रसायन जो भूमि की उर्ववरता को बढ़वा देते हैं जैव उर्वरक कहलाते हैं. ये उर्ववरक अपेक्षाकृत सस्ते तथा तीव्र होते हैं और यह पर्यावरण में प्रदूषण पैदा नहीं करते हैं. जैसे-
Ø  अनेक प्रकार के बैक्टिरिया-नाइट्रोसोमोनस, एजोटो बैक्टर, नाइट्रोबेक्टर, राइजोबियम (दलहनी फसलों की जड़ों में)
Ø  थियोबेसीलम की कुछ प्रजातियां (सल्फेटी उर्वरक)
Ø  क्लास्ट्रीयिम की कुछ प्रजातियां तथा अन्य
Ø  नाइट्रिकारी बैक्टिरिया.
ü  थियोबेसीलस डिनाइट्रीफिकेंस मृदा की नाइट्राइट एवं नाइट्रेट को स्वतंत्र नाइट्रोजन में मुक्त कर भूमि की उर्वरता को कम करता है.
ü  नील----हरित शैवाल---नोस्टोक और एनाबिना
ü  माइक्रोराइजल कवक (फास्फेटी उर्वरक)
ü  एजोला नामक फर्न
ü अल्फा-अल्फा, नीम, सनई

जैव-पीड़क नाशीः-
ऐसे जैव रसायन जो खर-पतवार या अपतृण (Weeds) तथा कीटों को नष्ट करते हैं जैव-पीड़कनाशी कहलाते हैं. इसके अंतर्गतः-

1-जैव-अपतृणनाशीः-
ऐसे जैव-पीड़कनाशी जो फसलों के लिए हानिकारक खर-पतवार को नष्ट करते हैं जैव-अपतृणनाशी कहलाते हैं. उदाहरण-कवकों (Fungi) से प्राप्त किये गये कोलेगो, वेल्गो, लुबोआ-लुबोआ, डिवाइन ABC-5003, इत्यादि प्रमुख है.

2-जैव-कीटनाशी-
ऐसे जैव पीड़कनाशी जो मनुष्य तथा फसलें दोनों के लिए हानिकारक कीटों को नष्ट करती है जैव कीटनाशी कहलाती है. जैसे-एजैडिरैचिटिन (नीम के मार्गोसीन रसायन से), पाइरेथ्रिन, सिनेरिन, थुरियोसाइट्स, इत्यादि.

Important Fact for EXAM:-

थुरियोसाइट्सः-
थुरियोसाइट्स नामक जैव कीटनाशी, Bacillus Thuringia sis नामक बैक्टिरिया के B.T जीन के नियंत्रण में संश्लेणित होता है. अमेरिकी कंपनी मोनेसेंटो द्वारा इस B.T जीन को टर्मिनेटर जीन तकनीकी के अंतर्गत कपास की ऐसी फसल में अंतर्विष्ट कराया गया है जो कीटरोधी होने के कारण अधिक पैदावार देने में सफल हुई है, परंतु इस फसल से उत्पन्न बीजों में अगली पीढ़ि के लिए सफल ढंग से अंकुरण की क्षमता समाप्त हो गई. अर्थात ये बीज यदि अंकुरित हो भी सकते हैं, परंतु इसमें पुष्प, फल, बीज इत्यादि का विकास नहीं होगा. आजकल यह तकनीकी अन्य फसलों में भी अपनायी जाती है. वर्मिनेटर जीन तकनीकी टर्मिनेटर जीन तकनीकी के समान है, परंतु वर्मिनेटर बीजों में अगली एक पीढ़ि के लिए अंकुरण की क्षमता पायी जाती है.


Sunday, 21 January 2018

IAS बनना है तो GS, GK और Current Affairs का फर्क समझिए?

दोस्तों IAS EXAM के लिए हमने एक नई सीरिज शुरू की है। इस सीरिज में हम आपको IAS की तैयारी के लिए ऐसे-ऐसे Tips देंगे जो आपको और कही नहीं मिलेगा। क्योंकि इसमें बेसिक्स के साथ-साथ Advance लेवल तक की तैयारी की रणनीति बताई जाएगी। अगर आप चाहते हैं कि आपको ऐसी टिप्स लगातार मिलती रहे तो आपको दो काम करना होगा। पहला आप अपनी स्क्रीन के राइट साइट पर नीचे दिख रहे बेल आइकन को टच करके इसे अलॉउ कर दें और दूसरा नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक दिया गया है उसे लाइक कर दें। इससे फायदा ये होगा कि जब भी नए लेख आएंगे आपको फौरन सूचना मिल जाएगी।
आज हम आपको बता रहें हैं कि IAS की प्रारंभिक परीक्षा के लिए आप कैसे शुरूआत करें? जिसके लिए जरूरी है की आपकी कुछ भ्रांतियों को दूर किया जाए। तो सबसे पहले पहली भ्राांति  को दूर कर लीजिए।
प्रारंभिक परीक्षा- कम समय में कैसे बनाएं रणनीति?
IAS की प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्न पत्र होते हैं। पहला सामान्य अध्ययन का और दूसरा CSAT का। जहां तक सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र का सवाल है इसमें तीन टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं।
1-सामान्य अध्ययन यानी Gernal Studies (G.S)
2-सामान्य ज्ञान यानी Gernal Knowledge (G.K)
3-समसामयिक (Current Affairs)
नए छात्रों के सामने सबसे बड़ी कठिनाई ये होती है कि उन्हें पता ही नहीं होता है कि GS और GK में फर्क क्या होता है? दोनों में आपको अंतर समझाएं इससे पहले ये जान लीजिए की IAS की परीक्षा में G.K से ना के बराबर सवाल आते हैं। जबकि PCS, SSC, BANK, RAILWAY जैसी परीक्षाओं में G.K से जुड़े सवाल खूब आते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि दोनों में भला अंतर क्या है? जब तक आप ये अंतर नहीं समझेंगे IAS की तैयारी नहीं कर पाएंगे। इसलिए जरूरी है कि पहले आप इसमें फर्क करना सीखें।
G.S का सीधा सा मतलब है General Studies यानी हर उस विषय का सामन्य अध्ययन जिसकी जरूरत समाज में एक अधिकारी या कर्मचारी के तौर पर आपको पड़ सकती है। जहां तक General Studies में आनेवाले विषयों का सवाल है इसमें।
  • भारत का इतिहास और फ्रीडम स्ट्रगल मूवमेंट
  • भारतीय संविधान और राज्यव्यवस्था
  • भारत और विश्व का भूगोल
  • पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
  • अर्थव्यवस्था और सांख्यिकी
  • सामान्य विज्ञान और प्रद्योगिकी
  • सामाजिक विकास और प्रशासन 
जैसे टॉपिक आते है। जबकि General Knowledge यानी G.K में सामान्य ज्ञान से जुड़े। अब सवाल ये है कि सामन्य ज्ञान क्या होता है? सामान्य ज्ञान का मतलब ऐसे टॉपिक्स से है जिससे जुड़े सवालों के जवाब एक सामान्य या कह लें आम आदमी को भी आना चाहिए। कहने का आशय ये है कि सामान्य ज्ञान एक सामान्य आदमी से जुड़ा ज्ञान हैं। जैसे,
  • सड़क पर गाड़ी चलाने के नियम क्या हैं?
  • भारत का राष्ट्रीय खेल क्या है?
  • राष्ट्रीय पक्षी मोर है तो क्यों है?
  • तिरंगा में कितने रंग होते हैं और कौन-सा रंग किसका प्रतीक है?
  • भारत का संविधान कब बना?
  • भारत की राजधानी क्या है?
  • भारत में कुल कितने प्रदेश हैं? कितने केंद्र शासित प्रदेश हैं?
यानी ऐसे प्रश्न जिसके बारे में आपको बचपन में ही पढ़ाया गया होगा। जहां तक करेंट अफेयर्स का सवाल है इसमें रोज-रोज की घटनाओं से जुड़े ऐसे टॉपिक होते हैं जिसका असर सामाज, देश-दुनिया और देश की सियासत और प्रशासन पर पड़ता है।
IAS की तैयारी की अगली कड़ी जल्द....
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Thursday, 28 December 2017

Clone क्या है? क्या आप क्लोनिंग के बारे में जानते हैं? पूरा कांसेप्ट करें क्लियर

क्लोन (Clone in Hindi)
यदि दो अलग-अलग कोशिकाओं की जींस रचना परस्पर बिल्कुल समान हो तो इनके गुणों में भी समानता होती है. अतः ये कोशिकाएं आपस में क्लोन कहलाती हैं. इसी प्रकार दो अलग-अलग जीवों की जींस रचना समान होने पर इन्हें भी परस्पर क्लोन कहा जाता है. क्लोन विकसित करने की तकनीक क्लोनिंग कहलाती है.
Question:-

किसी पौधे का क्लोन विकसित करने के लिए उसी पौधे के किस भाग से कोशिका लेनी पड़ेगा-
(A)- भ्रूण (Embryo)
(B)- भ्रूण पोष (endosperm)
(C)- बीज
(D) इनमें से कोई नहीं.

ANSWER-(D)

स्पष्टीकरणः-
Ø  उपरोक्त प्रश्न में सभी अवस्थायें युग्मक कोशिकाओं के निषेचन के फलस्वरूप उत्पन्न होती हैं. अतः क्रासिंग ओवर के कारण उनके जींस में बदलाव आ जाता है. अतः किसी पौधे का क्लोन विकसित करने के लिए उसके कायिक भागों या सोमेटिक भाग जैसे-जड़, तना, इत्यादि से कोशिका लेनी पड़ेगी.
Ø  डॉली भेड़ के क्लोनिंग प्रकरण में (डॉली नाम जर्मन गायिका का है) वैज्ञानिक द्वारा इसके माता भेड़ से थन कोशिका (कायिक या Somatic) तथा दूसरी अंडाणु कोशिका (युग्मक) ली गई, परन्तु अंडाणु कोशिका के जींस को थन कोशिका के जींस से प्रतिस्थापित कर दिया गया.

Question:-
निम्नलिखित में किसे परस्पर क्लोन माना जा सकता हैः-
(A) भातृ जुड़वा
(B) समरूप जुड़वा
(C) स्यामीज जुड़वा
(D) इनमें से कोई नहीं.

ANSWER-(D)
स्पष्टीकरणः-
Ø  भातृ-जुड़वा एक ही समय पर निर्मित दो अलग-अलग जाइगोट से विकसित होते हैं, अतः इनके जींस में भिन्नता आ जाती है.
Ø  समरूप जुड़वा एक ही जाइगोट के विभाजन से व्युत्पन्न होते हैं, अतः इनके जींस में समानता होती है.
Ø  समरूप जुड़वा के अंतर्गत परस्पर जुड़े हुए संताने स्यामीज जुड़वा कहलाती है.
Ø  मनुष्य में प्राकृतिक निषेचन फैलिपियोन नलिका के समीपस्थ भागों में होता है. इसी भाग में प्रारंभिक भ्रूणीय विकास शुरू हो जाता है, जबकि अंतिम भ्रूणीय विकास गर्भाशय में होता है, जबकि परखनखी शिशु या Test Tube Baby में निषेचन शरीर के बाहर (प्रायः परखनली में) होता है, जबकि भ्रूणीय विकास शरीर के अंदर होता है.

v  आजकल कृत्रिम निषेचन की अनेक विधियां बनायी जाती है. जैसे-
1-G.I.F.T (Gamete Intra Fallopian Tramps)
इसमें युग्मक कोशिकाओं को फैलोपियन नलिका में स्थान्तरित किया जाता है.
2-Z.I.F.T (Zaigot Intra Fallopian Transer)
इसमें बाहर से निर्मित जाइगोट, सीधे फैलोपियन नलिका में स्थान्तरित किया जाता है.
3-I.C.S.I (Intra Cytoplasmic Sperm Injection)-
इसमें शुक्राणु कोशिका सीरिन्ज में लेकर अंडाणु कोशिका में कोषा द्रव्य में सीधे अंतरविष्ट करा दिया जाता है.

Question:-
किसी भी प्राणी में माइट्रोकांड्रिया के जिन्स वित्पुन्न होते हैः-
(A) पिता से
(B) माता से
(C) दोनों से
(D) किसी से नहीं.

ANSWER-(D)

स्पष्टीकरणः-
चूंकि निषेचन प्रक्रिया में अंडाणु कोशिका पूर्णरूपेण भाग लेती है, जबकि शुक्राणु कोशिका का केवल केंद्रक युक्त सिर भाग ही निषेचन में सफल हो पाता है. अतः माइट्रोकांड्रिया शुक्राणु के मध्य भाग में स्थित होने के कारण यह निषेचन से बाहर रह जाती है.

स्टेम सेल (Stem Cell)
मनुष्य में शुक्राणु तथा अंडाणु के निषेचन से एक कोशिकीय जाइगोट की रचना बनती है जो भ्रूणीय विकास (विदलन प्रक्रिया) के माध्यम से क्रमशः मारुला, ब्लास्टुला (ब्लास्टोसिस्ट) तथा गैस्टुला की अवस्थाएं विकसित करता है. भ्रूण के प्रारंभिक दशा में इसकी कुछ मौलिक कोशिकाएं भिन्न अंगों को विकसित करने के लिए विशिष्टिकृत हो जाती हैं जो स्टेम कोशिकाएं कहलाती हैं. मनुष्य में ये कोशिकाएं ब्लास्टोसिस अवस्था से प्राप्त हो सकती हैं. इन स्टेम कोशिकाओं में विभाजित एवं पुनरूद्धभवन के द्वारा ये प्रयोगशाला में विशिष्ट अंगों को विकसित करने में समर्थ हो जाती हैं. स्टेम कोशिकाओं की सहायता से कैंसरग्रस्त अंगों का जैव रासायनिक नियंत्रणएटोप्टॉसिसकहलाता है.

Thursday, 21 December 2017

IAS और PCS में सलेक्शन के लिए Notes कैसे बनाएं? प्रैक्टिकल उपाय

नोट्स सफलता का पहला मंत्र है. अगर आपके नोट्स स्तरहीन हैं तो सफलता के चांसेज बहुत कम हो जाते हैं. लेकिन अगर आपके नोट्स स्तरीय हैं तो सफलता के चांसेज बढ़ जाते हैं. तो सवाल ये है कि एक स्तरीय नोट्स कैसे बनाएं? एक अच्छे नोट्स की क्या-क्या खासियत होनी चाहिए? आप नोट्स में ऐसा क्या लिखें जो आपको सफलता की ओर ले चले? आज हम आपको बिन्दुवार कुछ ऐसी गुढ़ बाते बताएंगे जिसे अपनाकर आप अपने नोट्स को स्तरीय बना सकते हैं. लेकिन उससे पहले नोट्स को लेकर कुछ गलत धारणाओं को समझना जरूरी है. तो आइए पहले समझते हैं नोट्स क्या नहीं है?
1-किताबों के अहम बिन्दुओं को सिर्फ कॉपी में नोट करना नोट्स नहीं है.
2-पांच-छह लोगों के नोट्स लेकर उसमें से अहम बातों को छांटना नोट्स नहीं है.
3-पूरी किताब को कॉपी में लिख लेना नोट्स नहीं है.
4-हर बिन्दुओं पर पांच-छह किताबों से प्वाइंट निकालकर लिखना नोट्स नहीं है.
तो सवाल ये है कि नोट्स क्या है? चलिए आपको बताते हैं कि नोट्स क्या है? नोट्स को कैसे बनाना चाहिए? नोट्स बनाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दोस्तों किसी भी विषय पर नोट्स बनाने से पहले आपको ये तय करना होगा कि आप किस परीक्षा के लिए नोट्स बना रहे हैं. हम यहां पर आईएएस परीक्षा के लिए नोट्स बनाने की चर्चा कर रहे हैं. तो हम फोकस उसी पर करेंगे. आप बाकि परीक्षाओं के लिए भी इसी मैथेड से नोट्स बना सकते हैं.

मान लीजिए आप आधुनिक इतिहास विषय के लिए नोट्स बना रहे हैं। तो सबसे पहले आपके पास तीन चीज होनी जरूरी है. 
1-आधुनिक इतिहास का सलेबेस.
2-पिछले 10 साल का अनसॉल्व पेपर.
3-इतिहास की एक बेसिक किताब. ये किताब NCERT भी हो सकती है.

अगर आपको स्तरीय नोट्स बनाना है तो सबसे पहले आप आधुनिक इतिहास के सलेबस को कम से कम 2-3 बार पढ़ डालिए. फिर इसके बाद अनसॉल्व पेपर को लीजिए. कोशिश कीजिए अगर ऐसा अनसॉल्व पेपर मिल जाए जिसमें शीर्षक वाइज सवालों को छांटा गया है तो बहुत अच्छा होगा. इसके लिए यूथ प्रकाशन, घटनाचक्र प्रकाशन, अरिहंत प्रकाश से लेकर कई प्रकाशनों का सॉल्व आता है आप उसे भी ले सकते हैं.

इसके बाद आप सलेबस के हिसाब से देखिए कि किस टॉपिक से कितने सवाल पूछे जा रहे हैं? किस तरह के सवाल आ रहे हैं? सवालों की प्रकृति कैसे साल-दर-साल बदल रही है? इसे समझने के बाद आप बेसिक किताब उठाइए और उसे पहली बार में सरसरी निगाह से पढ़ डालिए. चाहे कुछ समझ में आये चाहे ना आए.

इसके बाद आप एक बार फिर सलेबेस देखिए और शीर्षक वाइज सवालों को पढ़िए. आपको समझ में आने लगेगा कि जो सवाल पूछे जा रहे हैं वो किताब में कहां पर हैं. अब फिर से बेसिक बुक पर जाइए और उसका गहन अध्ययन शुरू कीजिए. साथ में मार्कर या फिर हाईलाइट जरूर रखें. जैसे ही आपको लगे कि इस जगह से परीक्षा में सवाल आ रहे हैं उसे मार्क कर लें. इस एक्सर्साइज में थोड़ा वक्त लगेगा. लगने दें. क्योंकि इससे आपका किसी भी विषय पर बेसिक ज्ञान मजबूत होगा. ये आपके मजबूत बुनियाद की पहली ईंट है.

किताब पढ़ने के बाद आप सलेबेस और अनसॉल्व के सवालों को फिर से देखें. आपको अब समझ में आ जाएगा कि सलेबस में बहुत से ऐसे टॉपिक हैं जिससे परीक्षा में बहुत कम सवाल पूछे जाते हैं. और कुछ टॉपिक ऐसे होते हैं जिससे सबसे ज्यादा. अब आपको इन टॉपिको को अलग-अलग छांटकर लिखना है.

अब आप फिर से अपने बेसिक बुक पर जाइए और सवाल के हिसाब से देखिए किस टॉपिक से कितने सवाल आए हैं. जिस टॉपिक से ज्यादा सवाल आएं हैं उसे पहले तैयार कीजिए. सवाल के जवाब ही आपके नोट्स हैं. अब आपको करना ये है कि किसी भी सवाल को आप अलग-अलग तरीके से खुद बनाइए और उसका जवाब बेसिक किताब में ढूढ़िये. जैसे ही जवाब मिले उसे कॉपी में लिख लें. हो सके तो नोट्स में सवाल को भी लिखते चलें. क्योंकि इस टॉपिक से सवाल आ रहे हैं मतलब कमीशन चाहता है कि आपकी इस टॉपिक पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए. और इस टॉपिक से परीक्षा में सवाल आने के चांसेज भी ज्यादा हैं. जो टॉपिक कम महत्वपूर्ण लग रहे हैं उस पर ज्यादा वक्त ना लगाएं. क्योंकि अगर इस टॉपिक से सवाल आएगा तो सिर्फ आप नहीं बाकि प्रतियोगी छात्रों को भी दिक्कत होगी. सफल वही होता है जो कॉमन सवालों को गलत नहीं करता है. विशेष के चक्कर में रहेंगे तो कभी भी सफल नहीं हो पाएंगे.

अब आपको समझ में आएगा कि बहुत से ऐसे सवाल हैं जिसका आपके बेसिक किताब में जवाब नहीं हैं. तब आप दूसरी किताब की मदद लें. ध्यान दें मदद स्तरीय किताब से लें ना कि बाजार में मिलनेवाली किसी गाइड से. और इस बात पर जरूर ध्यान दें कि आपको दूसरी किताब पूरी नहीं पढ़नी हैं. सिर्फ उतना ही पढ़ना है और उसे अपने नोट्स में शामिल करना है जिसका जवाब आपको अपनी बेसिक किताब में नहीं मिला है.

एक बात हमेशा ध्यान में रखें आपके नोट्स में हर टॉपिक के साथ कम से कम 5 पन्ने प्लेन होने चाहिए. क्योंकि जैसे-जैसे आपके पढ़ाई का स्तर बढ़ेगा आपको इस टॉपिक से जुड़े नए-नए फैक्ट मिलेंगे. जैसे ही कोई नया फैक्ट मिले उसे फौरन अपने नोट्स में जोड़ लीजिए. इसलिए सलाह यही दी जाती है कि नोट्स हमेशा A-4 साइज की प्लेन शीट पर बनाएं. क्योंकि जैसे-जैसे कोई फैक्ट आपको मिले आप जरूरत के हिसाब से शीट बढ़ा सकें. अगर आपको इस टॉपिक से जुडा कोई ड्राइग्राम या फिर फीगर मिलता है तो आप उसे सीधा फोटो कॉपी कराकर नोट्स में एड कर लीजिए.

इस छोटी-सी एक्सरसाइज से आप एक स्तरीय नोट्स बना सकते हैं. फिर आपको बेवजह की 10 किताबें पढ़ने की जरूरत नहीं होगी. एक बार मेहनत करके आप एक ऐसा नोट्स तैयार कर लेंगे जो हमेशा आपके काम आएगा. लेकिन हां, एक बात का ध्यान रखें बीच-बीच में आपको अपनी बेसिक किताब को पढ़ते रहना चाहिए. क्योंकि ये अनुभव रहा है कि आप एक ही किताब को जितनी बार पढ़ेंगे आपको नई चीज मिलेगी. आपका कांसेप्ट क्लियर होगा. फालतू की और ज्यादा से ज्यादा किताबों को पढ़ने से बचें। क्योंकि मोर स्टडी, मोर कंफ्यूजन वाली कहावत तो आपको पता ही होगी.

अगर आपको हमारी ये टिप्स पसंद आई तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें. क्योंकि बहुत-से ऐसे प्रतियोगी छात्र और छात्राएं हैं जो इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि वो नोट्स कैसे बनाएं?  

Tuesday, 19 December 2017

CSAT के बाद हिन्दी मीडियम के छात्र क्यों नहीं बन पा रहे IAS? विश्लेषण

    UPSC की सिविल सर्विसेज परीक्षा में जब से CSAT लागू हुआ है हिन्दी मीडियम के छात्रों के कामयाबी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ये सोचने वाली बात है कि ऐसा क्यों है? आखिर क्यों CSAT से पहले हिन्दी मीडियम के छात्रा ज्यादा सेलेक्ट होते थे और सी-सैट के बाद से उनकी कामयाबी का ग्राफ लगातार गिरता ही जा रहा है। आइए इसके पीछे के कुछ कारणों का बिन्दुवार विश्लेषण करते हैं।

    1-प्रारंभिक परीक्षा से विषय का हटना:-

    सी-सैट से पहले प्रारंभिक परीक्षा में एक वैकल्पिक विषय और सामान्य अध्ययन का पेपर होता था। हिन्दी मीडियम के छात्र वैकल्पिक विषय में अच्छा नंबर पा जाते थे और प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट में स्थान बना लेते थे। हालाकि वैकल्पिक विषय को लेकर स्केलिंग पद्धति हमेशा एक अबूझ पहेली थी, जिसकी वजह से हिन्दी मीडियम के छात्र भी विषय को हटाने की मांग करते थे। लेकिन सी-सैट लागू होने के बाद हिन्दी मीडियम के छात्रों को ये दांव उल्टा पड़ गया।   

    2-मुख्य परीक्षा से दो विषयों का हटना-

    जैसा कि आपको पता होगा कि जब से सी-सैट लागू हुआ तभी से मुख्य परीक्षा से दो विषयों को हटाकर एक विषय कर दिया गया है। पहले दो विषयों में हिन्दी मीडियम के छात्र अच्छा नंबर खींच लेते थे। उन्हें स्केलिंग का भी फायदा मिल जाता था। जिससे उन्हें इंटरव्यू देने का मौका मिल जाता था। विषय होने से हिन्दी मीडियम के छात्रों को एक फायदा ये भी था उन्हें पेपर की भाषा अासानी से समझ में आज जाती थी क्योंकि पेपर की भाषा उतनी कठिन नहीं थी जितनी आज के सामान्य अध्ययन के पेपरों की होती है। लिहाजा पेपर को आसानी से समझकर उसका उत्तर लिखा जा सकता था।


    3-हिन्दी मीडियम में सामान्य अध्ययन की अच्छी कोचिगों का आभाव-

    दिल्ली की मुखर्जीनगर को IAS के हिन्दी मीडियम छात्रों का मक्का माना जाता रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। मुखर्जीनगर हिन्दी मीडियम के छात्रों का गढ़ भी इसलिए बन पाया था क्योंकि यहां पर विषय के अच्छे टीचर थे। विषय के अच्छे टीचरों की वजह से ही मुखर्जीनगर में छात्रों का जमावड़ा हुआ। लेकिन सी-सैट के बाद ये टीचर खुद को नए सैलेबस के अनुसार ढाल नहीं पाए। आप माने या माने लेकिन ये सच है कि सामन्य अध्ययन के सारे पेपरों के लिए जितनी अच्छी किताबें और टीचर अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध है उतने हिन्दी में नहीं है। और दुर्भाग्य ये है कि मुखर्जीनगर में जो टीचर हैं वो सब विषय के विशेषज्ञ रहे हैं ना कि सामान्य अध्यन के। इस वजह से सी-सैट लागू होने के बाद ये सारे विषय विशेषज्ञ पैदल हो गए। अब ये टीचर सिर्फ छात्रों को ठगकर पैसा कमा रहे हैं। असलियत ये है कि इन्हें अगर IAS के सामान्य अध्ययन का कोई भी पेपर सॉल्व करने के लिए दे दीजिए इनके हाथ-पांव फूल जाते हैं।

    हिन्दी मीडियम के छात्रों की कठिनाइयों पर हम आगे भी बात करेंगे। उसका निदान भी बताएंगे। फिलहाल आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप 2016 में आईएएस में सलेक्ट अनीता यादव की कॉपी देख सकते हैं। अनीता ने कॉपी Vision ias कोचिंग में टेस्ट सीरिज लिखने दौरान लिखी थी। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं IAS की मुख्य परीक्षा में हिन्दी मीडियम के छात्रों की कॉपी किस लेवल की होनी चाहिए। 


    दोस्तों अगर आपको हमरा ये विश्लेषण पसंद आया हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर का बटन दबाएं। ताकि हिन्दी मीडियम के छात्रों तक ये मैसेज जाए और उनके सामने आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई जाए।


    ANITA YADAV RANK-350, 2016 (HINDI MEDIUM)


Thursday, 14 December 2017

अगर IAS बनना है तो ना करें ये 10 गलतियां?

1-बिना सोचे-विचारे तैयारी शुरु करना
हर छात्र की तैयारी की अपना स्तर और क्षमता होती है। अगर आप सिर्फ दूसरों की नकल करके तैयारी की शुरुआत करेंगे तो आप IAS नहीं बन सकते हैं क्योंकि हर इंसान का आईक्यू अलग-अलग होता है। मतलब अगर आपके परिचित में कोई IAS बन जाता है तो ऐसा नहीं कि आप भी IAS बन जाएंगे। या फिर आपके रिश्तेदारी में आप से कम पढ़नेवाला कोई छात्र IAS की परीक्षा में सेलेक्ट हो गया तो आप भी सेलेक्ट हो जाएंगे। किसी भी छात्र की अंदरूनी क्षमता कोई नहीं आंक सकता है। लिहाजा अगर आपको लगता है कि आप सच में आईएएस की परीक्षा पास कर सकते हैं तभी तैयारी करें। इसके लिए आप पुराने अनसॉल्व पेपर के साथ सेलेबस देंगे और फिर मंथन करें कि आप क्या इस लेवेल की तैयारी कर पाएंगे।

2-तैयारी से पहले रणनीति नहीं बनाना
बिना विचारे जो करें वो पाछे पछताए। ये कहावत तो सुनी होगी आपने। अगर आप भी बिना विचारे तैयारी शुरू करेंगे तो आपको बाद में पछताना पड़ेगा। इसलिए पहले आईएएस परीक्षा का लेवल देख लें फिर अपनी क्षमता देखकर ही तैयारी शुरु करें। नहीं सारे प्रयास खत्म होने के बाद पछताएंगे तो कुछ नहीं मिलेगा। वक्त भी जाएगा और कांफिडेंस भी।

3-प्रमाणिक किताबों को नहीं पढ़ना
गाइड से आईएएस परीक्षा की तैयारी अगर आप करने की सोच रहे हैं तो तैयारी बिल्कुल भी ना करें। क्योंकि आईएएस परीक्षा के सवाल किसी गाइड से नहीं आते हैं और ना ही वो किसी सेट पैटर्न पर आते हैं। इसलिए आपको अपने आप को इतना ग्रुम करना होगा कि आप गाइड के स्तर से ऊपर निकल सकें। इसलिए सिर्फ और सिर्फ प्रामाणिक किताबों का अध्यन करें और ज्यादा किताब पढ़ने से बेहतर है कि आप एक ही किताब को बार-बार-बार पढ़ें। जबतक आपका कांसेप्ट क्लियर नहीं हो जाता।

4-ग्रुप बनाकर नहीं पढ़ना
आईएएस बनने के बाद आपको  टीम वर्क में काम करना होता है। इसलिए इस तैयारी के लिए जरुरी है कि आप टीम बनाकर पढ़ें। इसके कई फायदें हैं। एक तो आपको सही मार्गदर्शन मिलता रहेगा और फालतू के निगेटिव विचारों से बचेंगे। साथ ही ऐसी बहुत से टॉपिक जो आपको समझ में नहीं आ रहे हैं ग्रुप में पढ़ने पर जल्द क्लियर हो जाते हैं। बस ग्रुप बनाते समय इस बात का ध्यान दें कि सभी लोग सीरियस हों। वर्ना ये ग्रुप अय्याशी का अड्डा बन जाएगा।

5-दूसरे के Study Plan को Follow करना
दुनिया में हर इंसान की प्रवृति अलग होती है। कोई नोट्स बनाकर पढ़ता है तो कोई किताब से ही पढ़ लेता है। इसलिए कभी-भी दूसरों का स्टडी प्लान कॉपी नहीं करें। इसमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा है। अपना खुद का स्टाइल डेवलप करें।

6-टाईम टेबल बनाकर नहीं पढ़ना
बहुत से छात्रों की शिकायत होती है कि वो पढ़ते तो बहुत हैं लेकिन सलेक्शन नहीं होता है। दरअसल होता ये है कि ऐसे छात्र एक ही विषय पर बहुत ज्यादा वक्त दे देते हैं। इसलिए टाईम टेबल बनाकर पढ़िए। अपनी पढ़ाई को एक निश्चित टाइम फ्रेंम में बांधने की कोशिश कीजिए। इससे फायदा ये होगा कि आपका समय बचेगा और सभी विषयों पर बराबरी से आप वक्त दे पाएंगे।

7-जरुतर से ज्यादा नोट्स जुटाना
तैयारी करने वाले छात्रों की सबसे बुरी आदत होती है व्यर्थ के नोट्स जुटाना। कोई सेलेक्ट हो गया तो उसके नोट्स के चक्कर में पड़ जाते हैं। मौका मिलते ही उसे फोटो कॉपी कराने लगते हैं। दरअसल ऐसे छात्र अपनी पढ़ाई से ज्यादा दूसरों की पढ़ाई पर ध्यान देते हैं। उन्हें लगता है अगर कोई सेलेक्ट हो गया तो उसका नोट्स बहुत अच्छा होगा। ऐसे लोगों को सलाह है कि ऐसा नहीं है कि IAS Topper और IAS में सफल होनेवाले के नोट्स में कोई ज्यादा फर्क होता है। एक ही कोचिंग से पढ़े छात्रों में कोई सफल होता है और कोई सफल नहीं होता है। ऐसे में ये ध्यान रखना चाहिए कि आप जो कुछ भी पढ़ रहे हैं उस पर आपका कांफिडेंस है कि नहीं। विषय आपको क्लियर हो रहे हैं कि नहीं। इसलिए दूसरों के नोट्स उतना ही जुटाएं जितना पढ़ सकें। वैसे अपना नोट्स सबसे अच्छा होता है। अगर आप खुद के नोट्स बनाएंगे तो इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता।

8-दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ना
मोर स्टडी मोर कंफ्यूजन। ये कहावत तो आपने सुनी होगी। अगर आप दो से ज्यादा न्यूज पेपर पढ़ रहे हैं तो आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। कोशिश करें सिर्फ दो न्यूज पेपर पढ़ें। जिसमें से एक हिन्दी और एक अंग्रेजी हो। सिर्फ वही पढ़ें जो परीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो।

9-असफल लोगों से सलाह लेना
असफल लोगों से बात जरुर करें लेकिन उनसे सलाह ना लें। बात करने से फायदा ये होगा कि आप ये जल्द समझ जाएंगे कि कहां पर गलती करने से ये लोग सफल नहीं हुए हैं। लेकिन अगर आप अफसल लोगों से सलाह लेंगे तो आपको बहुत नुकसान होगा। क्योंकि असफल इंसान अपनी गलती कभी नहीं मानता तो सिर्फ दूसरों पर सारी तोहमत मढ़ता रहता है। मतलब कमीशन में बेइमान लोग बैठे हैं। कोचिंग में ठीक से नहीं पढ़ाया गया। वगैरह-वगैरह।

10-खुद पर भरोसा नहीं करना
IAS की तैयारी का पहला मंत्र हैं खुद की तैयारी भरोसा रखना। अगर आप खुद पर यकीन नहीं करते तो आप तैयारी की सोचिए भी नहीं। क्योंकि ये परीक्षा ही नेतृत्व क्षमता की तलाश के लिए ली जाती है। और जो इंसान खुद पर कांफिडेंस नहीं है वो दूसरों का नेतृत्व कभी नहीं कर सकता है।

तो दोस्तों ये थी वो 10 गलतियां जिसे करने पर आप IAS की रेस से बाहर हो सकते हैं। इसलिए आज ही इन गलतियों से बचे। और हां। अगर आपको ये लेख पसंद आया हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें, ताकि जो लोग इस परीक्षा की तैयारी कर रहेे हैं उन तक सही मैसेज पहुंच सके। 

Sunday, 27 August 2017

भूगोल के इन तथ्यों को जरूर तैयार कर लें, परीक्षा में आने की पूरी संभावना है

भारत के भूगोल से हर परीक्षा में सवाल आने तय हैं। अनुभवी लोगों का मानना है कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके पूछे जाने का प्रतिशत बहुत ज्यादा होता  है। आप किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्रों को देखें। आपको भूगोल से जुड़े ये सवाल जरूर मिल जाएंगे। ऐसे ही कुछ सवालों से जुड़े Facts हम नीचे दे रहे  हैं। इसे तैयार कर लें। इससे जुड़े सवाल आपको परीक्षा में जरूर मिलेंगे।

भारत का भौगोलिक विस्तार

विस्तार- 
6 डिग्री 4 मिनट से 37 डिग्री 6 मिनट उत्तरी अक्षांश तथा 67 डिग्री 7 मिनट से 97 डिग्री 25 मिनट पूर्वी देशांतर

मानक समयः 82-1/2° देशांतर रेखा (82°30' पूर्वी देशांतर रेखा को) पूर्वी देशांतर (इलाहाबाद के नैनी से)

मानक समय रेखा पर स्थित राज्यः 
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडीसा और आंध्र प्रदेश

कर्क रेखा पर स्थित राज्यः (कुल-8)-
गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं मिजोरम

स्थलीय सीमाः- 15200 किलोमीटर

तटीय सीमाः- 6100 किलोमीटर

तटीय सीमा (द्वीपों सहित):- 7516.6 किलोमीटर

भारत की कुल सीमाः- 22716.6 किलोमीटर

पड़ोसी देशों की सीमा का घटता क्रमः- 
बांग्लादेश (सर्वाधिक)> चीन> पाकिस्तान> नेपाल> म्यांमार> भूटान> अफगानिस्तान

देश की चतुर्दिक सीमा अंतिम बिन्दुः-
दक्षिणतम बिन्दु- इंदिरा प्वाइंट
उत्तरतम बिन्दु- इंदिरा कॉल
पश्चिमतम- गोरमोता (गुजरात)
पूर्वोत्तम- किबिथु (अरूणांचल प्रदेश)

प्रमुख चैनल/जलडमरूमध्यः-

ग्रेट चैनल- इंदिरा प्वाइंट- इंडोनेशिया
10 डिग्री चैनल- लघु अण्डमान- कार निकोबार
9 डिग्री चैनलः- मिनिकॉय- लक्षद्वीप
8 डिग्री चैनल:- मालदीप-मिनिकॉय
मरकत द्वीप- अण्डमान निकोबार द्वीप समूह
आदम ब्रिज- तमिलनाडु एवं श्रीलंका के मध्य
रामेश्वरम्- पम्बन द्वीप पर स्थित
पाण्डिचेरी/पुदुचेरीः- पुदुचेरी, कराइकल (तमिलनाडु में स्थित), यनम (आंध्र प्रदेश), माहे (केरल)

भू-आवेष्ठित प्रदेश/राज्य
1-मध्यप्रदेश
2-छत्तीसगढ़
3-हरियाणा
4-झारखंड
5-तेलंगाना

अन्तर्राष्ट्रीय सीमा बनाने वाले कुल राज्य-17
भारत का क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का 2.42% हिस्सा है
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में स्थान- 7 वां 

भारत का प्राकृतिक विभाग-
1-मैदानी--------------- 43%
2-पठारी क्षेत्र----------- 27.7%
3-पहाड़ी क्षेत्र------------ 18.6%
4-पर्वतीय क्षेत्र---------- 10.7%

भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं-

डूरण्ड रेखा-----------पाकिस्तान व अफगानिस्थान के बीच
मैकमोहन रेखा-------भारत व चीन के बीच
रेडक्लिफ रेखा-------भारत व पाकिस्तान के बीच
शून्य रेखा (Zero Line):- त्रिपुरा व बांग्लादेश के बीच

देश एवं सीमा पर स्थित राज्यः-
1-बांग्लादेश- पं बंगाल, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, असम
2-चीन- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
3-पाकिस्तान- गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर
4-नेपाल- उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड
5-म्यांमार- अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मिजोरम, मणिपुर
6-भूटान- पं बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम
7-अफगानिस्तान- जम्मू एवं कश्मीर (पाक् अधिकृत)

भारत के राज्य क्षेत्रफल के अनुसार (घटते क्रम में)-
राजस्थान> मध्य प्रदेश> महाराष्ट्र> उत्तर प्रदेश

डंकन पास---- दक्षिण अण्डमान एवं लघु अंडमान के मध्य
कोको स्ट्रेट--- यह कोको द्वीप व अण्डमान के मध्य

Thursday, 13 July 2017

पिछले 4 साल के IAS टॉपर्स की कॉपी देखकर जानिए कोई IAS में क्यों सफल होता है?

दोस्तों क्या आप लोगों के मन में भी ये ख्याल आता है कि IAS Topper ऐसा क्या लिखते हैं कि वो परीक्षा में टॉप कर जाते हैं? आखिर उनकी कॉपी में ऐसा क्या होता है कि उन्हें परीक्षा में ज्यादा नंबर मिलते हैं? वो प्रश्नों की शुरुआत और प्रश्नों का अंत कैसे करते हैं? किसी भी मुद्दे पर लिखते समय वो किन बातों का ध्यान रखते हैं। अगर आपके मन में भी ये सभी सवाल कौंधते हैं तो हम आपकी मदद कर सकते हैं।

आपको करना बस इतना है कि आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके 2013 से लेकर 2016 तक के उन सभी टॉपर की कॉपी देख सकते हैं जिन्होंने इतिहास रच दिया है। हमारी सलाह है कि आप पिछले चार साल के इन टॉपरों की कॉपी को ना सिर्फ डाउनलोड कर लें बल्कि हो सकते तो इसका प्रिंट आउट भी निकालकर अपने पास रख लें। और रखे ही ना इसे हफ्ते में एक बार वक्त निकालकर जरूर पढ़ें।

पढ़ने समय इस बात का विश्लेषण जरूर करें कि 2013, 2014, 2015 और 2016 के टॉपरों की कॉपी में क्या समानताएं और क्या अंतर। इससे फायदा ये होगा कि आपको एक बात साफतौर पर पता चल जाएगी कि आपको अपनी क्या चींज़ जरूर से शामिल करनी हैं। साथ ही आपको ये भी अंदाजा लग जाएगा कि जब मेंस में उत्तर लिखना शुरू करें तो सबसे उसमें किन तथ्यों को जरूर शामिल करें। इस तरीके से टॉपरों की कॉपी का विश्लेषण करने से आपको ये भी पता चल जाएगा कि आपको मेंस परीक्षा में लिखते समय क्या नहीं लिखना है? थोड़ा कठिन काम है लेकिन अगर आप ने एक्सरसाइज कर ली तो यकीन मानिए आपकी कॉपी भी किसी टॉपर से कम नहीं होगी।  

पिछले 4 साल के टॉपरों की कॉपी देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। ये वो कॉपी है जो इन टॉपरों ने Vision IAS की मेंस सीरिज में लिखी थी। 

2016

ANMOL SHER SINGH BEDI RANK-2, 2016

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